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शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री डॉ. उमर अब्दुल्ला से शिष्टाचार भेंट के दौरान हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों के सामने उत्पन्न हो रहे गंभीर संकट पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की आयात नीति तथा लगातार किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के कारण हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड सहित देश के लाखों सेब बागवानों की आजीविका पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। 

रोहित ठाकुर ने कहा कि एक ओर भाजपा सरकार विदेशी सेब के आयात को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश सहित देश के सभी सेब उत्पादक राज्यों के लाखों बागवानों के हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापारिक समझौते के तहत सेब पर आयात शुल्क में रियायत दी है और अब यूरोपियन यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही अमेरिका के साथ भी प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के तहत सेब व अन्य कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त करने की तैयारी की जा रही है जिससे देश के सेब उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

रोहित ठाकुर ने कहा कि सस्ते आयातित विदेशी सेब की बढ़ती आमद से घरेलू सेब को बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा जिससे बागवानों की लागत, मेहनत और आय पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. उमर अब्दुल्ला के साथ इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श करते हुए कहा कि सेब उत्पादक राज्यों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर केंद्र सरकार के समक्ष अपनी आवाज बुलंद करनी होगी, ताकि लाखों बागवानों के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा की जा सके। 

रोहित ठाकुर ने मुख्यमंत्री डॉ. उमर अब्दुल्ला से चर्चा करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर राम लाल ने वर्ष 1983 में सेब बागवानों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से सेब को मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के अंतर्गत शामिल करवाया था। इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार की 50:50 प्रतिशत वित्तीय भागीदारी थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हर वर्ष लगभग 1,500 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान करती थी, लेकिन वर्ष 2022-23 में एमआईएस के लिए अपना बजटीय प्रावधान समाप्त कर इसका अतिरिक्त वित्तीय बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया। इससे राज्य सरकारों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है और बागवानों के हित भी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) में अपनी 50 प्रतिशत वित्तीय हिस्सेदारी पुनः बहाल करनी चाहिए।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि सेब बागवानी केवल एक कृषि गतिविधि नहीं, बल्कि पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। तथा प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए रोजगार का साधन हैं। ऐसे में हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर सहित सेब उत्पादक राज्यों को बागवानों के हितों की रक्षा के लिए साझा रणनीति बनाकर केंद्र सरकार के समक्ष एकजुट होकर अपनी बात रखनी होगी।

By admin

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