शिमला। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में हो रही कथित धांधलियों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए इस की कड़ी निंदा की है। उसने आरोप लगाया है कि ये धांधलियां भाजपा और आरएसएस के इशारे पर हो रही है। साथ ही कहा कि भाजपा और आरएसएस ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को धांधलियों का अड्डा बना दिया है।
माकपा ने कहा कि जिस तरह विवि के कुलपति सिकंदर कुमार, पीएल शर्मा (निदेशक), अरविन्द भट्ट (डीन प्लानिंग) ने अपने बच्चों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों को ताक पर रख कर अपने बच्चों की पीएचडी में दाखिला किया है, यह बहुत बड़ा भ्रष्टाचार है और इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। माकपा के शिमला इकाई के सचिव बाबू राम ने कहा कि जब भी कोई नियम बनता है तो उसे लागू करने के लिए रूल या प्रक्रिया बनती है। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों के बच्चों के लिए पीएचडी में एक सीट आरक्षित कर भी दी तो क्या यहां सिकंदर कुमार, अरविन्द भट्ट और पीएल शर्मा के बच्चे ही थे। विवि में 1200 गैर शिक्षक और करीब 350 शिक्षक हैं। बाबू राम ने पूछा कि क्या इसके लिए प्रवेश प्रक्रिया अपनाई गई थी। साथ ही पूछा कि क्या सभी विभागों में सभी को बराबर आवेदन करने का मौका दिया और आवेदन के लिए कब अधिसूचना निकाली गई? उन्होंने कहा कि जिन लोगों को आज पहले पिछले दरवाजे से पीएचडी में दाखिला दिया है, कल पिछले दरवाजे से ही विश्वविद्यालय में नौकरी लगवाएंगे।
माकपा ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय लगातार भ्रष्टाचार का अखाड़ा बनता हुआ नजर आ रहा है। और कुछ भ्रष्ट अधिकारी विश्वविद्यालय की साख को धूमिल करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के कुलपति अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीपीआईएम इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करेगी। उन्होंने मांग की कि इस महाघोटाले के खिलाफ हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय को स्वयं संज्ञान लेकर आम छात्रों को न्याय प्रदान करना चाहिए व गलत प्रवेशों को रद्द करना चाहिए।
