शिमला। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा है कि हिमाचल सरकार को स्कूलों व अन्य शिक्षण संस्थानों में फीस माफी के लिए ठोस नीति बनानी चाहिए। साथ ही इसे लेकर जनता को भी सही जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में शिक्षा मंत्री को इस दिशा में काम करना चाहिए, ताकि प्रदेश के अभिभावकों पर इस घड़ी में अतिरिक्त बोझ न पड़े।
शर्मा ने रविवार को यहां कहा कि प्रदेश के कई निजी स्कूलों ने इस दौरान भी फीस मांग ली है और इसमें शामिल ऑनलाइन शिक्षा का भुगतान भी जोड़ा जा रहा है। जोकि पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई निजी स्कूल प्रबंधक ऐसे भी हैं जिन्होंने कोरोना के इस संकट के बीच बच्चों की एक से तीन माह की फीस माफ कर सराहनीय कदम उठाए है, वहीं दूसरी ओर राजधानी शिमला समेत कई अन्य स्थानों के स्कूल ऐसे हैं जो और अधिक फीस मांग रहे हैं।
बिना व्यवस्था जांचे न खोले जाएं स्कूल – शर्मा
सुधीर शर्मा ने कहा कि मिली सूचना के अनुसार शिक्षा निदेशालय ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है कि 3 मई से स्कूलों में पढ़ाई शुरू कर दी जाए। लेकिन सरकार को चाहिए कि पहले स्कूलों की व्यवस्था भी देखी जाए। प्रदेश में कई स्कूलों के पास न खेल मैदान न बच्चों को बिठाने की उचित व्यवस्था है। ऐसे में इस बीमारी के दौर में बिना व्यवस्था जांचे बच्चों के स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ हो सकता है। उनका कहना था कि प्रदेश में अधिकतर निजी स्कूल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अधीन हैं और इनमें कई स्कूल ऐसे भी हैं, जहां बच्चों को छोटे-छोटे कमरों में बिठाया जाता है। इन स्कूलों में व्यवस्था सही नहीं है। ऐसे में यह संक्रमण और बढ़ जाएगा।
शर्मा ने कहा कि शिक्षा निदेशालय को इससे पहले स्कूली बच्चों को लाने व ले जाने वाले वाहनों की व्यवस्था भी देखनी होगी। इसमें सरकारी व निजी दोनों संस्थानों में पहले ऐसी व्यवस्था करने की जरूरत है कि इस बीमारी के संक्रमण से बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित रहें। इसके लिए पार्किंग से लेकर स्कूलों के कमरों व शौचालयों की ढंग से व्यवस्था करने तथा इन्हें रोजाना सैनिटाइज करने की जरूरत भी होगी। ऐसे में सरकार को चाहिए कि जब भी स्कूल खोले जाएंगे तो यह व्यवस्था जरूर बनाएं कि स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन हो। सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार से स्कूल में अन्य सभी शिक्षण संस्थानों में जरूरी दिशानिर्देश लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि हर शिक्षण संस्थान के प्रवेश द्वार में रोज सुबह बच्चों की स्क्रीनिंग करना भी जरूरी होना चाहिए। बिना सुविधाओं के शिक्षण संस्थान शुरू न किए जाएं। नहीं तो यह बच्चों के साथ एक बड़ा खिलवाड़ हो सकता है।
