धर्मशाला। धर्मशाला के विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर शर्मा ने सुक्खू सरकार पर कर्मचारियों, युवाओं और आम जनता से चुनावी वादों से मुकरने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले जिस ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का दावा किया गया था, वह अब वादाखिलाफी, वित्तीय अव्यवस्था और कर्मचारियों की अनदेखी का पर्याय बन गया है।
सुधीर शर्मा ने एक बयान में कहा कि कोरोना महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं देने वाले कोरोना वॉरियर्स को नौकरी से हटाना सरकार के कथित व्यवस्था परिवर्तन का पहला उदाहरण है। उन्होंने कहा कि संकट के समय प्रदेश की सेवा करने वालों के साथ ऐसा व्यवहार सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने युवाओं को रोजगार और सरकारी नौकरियों को लेकर बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन वादों का क्या हुआ, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। उन्होंने विभिन्न ‘मित्र’ श्रेणियों में नियुक्तियों को लेकर भी सरकार पर भाई-भतीजावाद और राजनीतिक लाभ के आरोप लगने की बात कही।
कर्मचारियों की आवाज दबाने का आरोप
सुधीर शर्मा ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन जैसी कार्रवाई करना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी किसी सरकार की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की व्यवस्था की रीढ़ हैं और उन्हें अपनी समस्याएं उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की आवाज सुनने के बजाय उन्हें डराने और दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
एचआरीसी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर उठाए सवाल
भाजपा नेता ने एचआरटीसी कर्मचारियों की समस्याओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कर्मचारी दिन-रात जनता को परिवहन सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलना, ओवरटाइम का भुगतान लंबित रहना और पेंशन में देरी उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ा रही है। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब कर्मचारियों की जेब खाली है तो सरकार के वित्तीय प्रबंधन के दावों में खजाना आखिर कहां है।
ओपीएस पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग
सुधीर शर्मा ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लेकर भी सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कितने कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ मिला है, कितने कर्मचारी अभी भी इससे बाहर हैं और इससे कर्मचारियों को वास्तविक वित्तीय लाभ कितना मिला है। उन्होंने कहा कि केवल बयानबाजी से ओपीएस लागू नहीं होता, इसका लाभ कर्मचारियों के खातों में दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने पेंशनरों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लंबित वित्तीय देनदारियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों ने अपना पूरा जीवन प्रदेश की सेवा में लगा दिया, उन्हें अपनी ही मेहनत की कमाई के भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। यदि किसी कर्मचारी की 30-40 लाख रुपये की राशि लंबित है तो उसके परिवार की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
डीए और पे कमीशन एरियर पर सरकार को घेरा
सुधीर शर्मा ने कर्मचारियों के लंबित वे कमीशन एरियर और 15 प्रतिशत डीए का भुगतान न होने पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास घोषणाओं के लिए शब्द हैं, लेकिन कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए पैसा नहीं है। उन्होंने मंत्रियों और विधायकों के चिकित्सा भुगतान तथा कर्मचारियों के मेडिकल दावों में समान नीति लागू होने को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
सुधीर शर्मा ने कहा कि अब प्रदेश की जनता को भाषण नहीं, बल्कि सरकार से हिसाब चाहिए। कोरोना वॉरियर्स का रोजगार, युवाओं को सरकारी नौकरियां, एचआरटीसी कर्मचारियों का वेतन, पेंशनरों की समस्याएं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लंबित राशि, डीए और पे कमीशन एरियर जैसे मुद्दों पर सरकार को जवाब देना होगा।
