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कुल्लू। कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा है कि खेती प्रदेश के लोगों का मुख्य व्यवसाय है और राज्य सरकार किसानों से सीधे जुड़कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कृषि एक बड़ा उद्योग है, जिससे प्रदेश की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है, जबकि देश की जीडीपी में भी कृषि क्षेत्र का 7 से 8 प्रतिशत योगदान है। वे पतलीकूहल में जिला स्तरीय किसान मेले को संबोधित कर रहे थे।

कृषि मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कृषि योग्य भूमि सीमित है, इसलिए कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों को खेतों के आकार, मिट्टी की उर्वरता तथा स्थानीय जलवायु के अनुरूप खेती और बागवानी को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के मौसम सम्बंधित अध्ययन करने के लिए कृषि अधिकारियों को देहरादून में विशेष प्रशिक्षण भी दिलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने और कृषि संबंधी सभी जानकारियां पोर्टल पर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे प्रदेश की सभी मंडियां आपस में जुड़ेंगी और किसानों को अपने उत्पादों के बेहतर मूल्य की जानकारी समय पर मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव और आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ रही है।

प्राकृतिक खेती सरकार की प्राथमिकता 

कृषि मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती हिमाचल प्रदेश सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, खेती की लागत कम करना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना तथा रसायन-मुक्त खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में हजारों किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं और सैंकड़ो हैक्टेयर भूमि पर इस पद्धति से खेती की जा रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करने वाला देश का पहला राज्य है। राज्य सरकार ‘राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना’ के तहत किसानों के उत्पादों की खरीद की जा रही है।

 चंद्र कुमार ने कहा कि इसके तहत प्राकृतिक रूप से उत्पादित गेहूं का एमएसपी 80 रुपए प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी का 150 रुपए प्रति किलोग्राम, मक्का का 50 रुपए प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी में उत्पादित जौ का 80 रुपए प्रति किलोग्राम तथा अदरक का 30 रुपए प्रति किलोग्राम तय किया गया है। यह पहल किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उनकी आय में वृद्धि और टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती उत्पादों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए हमीरपुर में अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि कुल्लू जिले की नौ मंडियों से 5 करोड़ 15 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। कृषि मंत्री ने पतलीकूहल स्थित कृषि एवं पशुपालन विभाग की खाली भूमि पर गौशाला निर्माण का आश्वासन भी दिया।

इससे पहले, मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने किसान मेला आयोजित करने के लिए कृषि मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाएं किसानों और बागवानों के लिए संजीवनी साबित हो रही हैं तथा पंचायत स्तर तक ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

  इस अवसर एपीएमसी अध्यक्ष राम सिंह मियां ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए किसानों और बागवानों को एपीएमसी के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी दी।

इस अवसर पर पूर्व विधायक बलबीर ठाकुर, पूर्व विधायक रघुवीर ठाकुर, प्रधान फल उत्पादक संघ के प्रेम शर्मा, देविंदर नेगी, बीर सिंह ठाकुर, प्रगतिशील बागवान नकुल खुल्लर, अतिरिक्त निदेशक कृषि अतुल डोगरा, परियोजना निदेशक आत्मा वीरेंद्र कुमार बग्गा, रितु गुप्ता, राकेश पटियाल, सुशील कुमार, अरुण शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, प्रगतिशील किसान, बागवान एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। 

By admin

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