जैव-विज्ञान विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. महावीर सिंह ने कहा है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के समन्ध्य की आवश्यकता पर वर्तमान समय में बल दिया जाना चाहिए ताकि एक सतत् और सुदृढ़ भविष्य की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सके। उन्होंने जैव-विज्ञान विभाग को ऐसे प्रासंगिक और उपयोगी सम्मेलन के आयोजन के लिए सराहा और युवा शोधकर्ताओं को पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।
वे वीरवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के जीव विज्ञान विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “सस्ट्रेनेबल फ्यूचर और रेज़िलिएंट अर्थ के लिए वैज्ञानिक हस्मक्षेप और हरित अनुसंधान” के शुभारंभ अवसर पैर बोल रहे थे। यह सम्मेलन सेंटर फॉर ग्रीन एनर्जी एंड नैनोटेक्नोलॉजी के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है तथा इसका प्रायोजन प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-ऊषा) द्वारा किया गया है। इस सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के बीच संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करना है ताकि सतत् एवं पर्यावरण अनुकूल वैज्ञानिक नवाचारों को बढ़ावा दिया जा सके।
कुलपति ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व ऊर्जा संकट, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। वैज्ञानिक अनुसंधान और हरित ऊर्जा के माध्यम से ही हम एक स्थायी और सुदृढ़ पृथ्वी का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अब ऐसी शोध संस्कृति विकसित करनी चाहिए जो समाज के लिए उपयोगी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो।
प्रो. आर.सी. सोबती (पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़) और प्रो. आर.पी. टंडन (दिल्ली विश्वविद्यालय) ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए। दोनों वैज्ञानिकों ने अंतःविषय सहयोग और हरित प्रौद्योगिकी के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास और पर्यावरणीय क्षरण जैसी वैश्विक समस्याओं के समाधान पर बल दिया।
उद्घाटन सत्र में प्रो. बी.के. शिवराम (डीन ऑफ स्स्डीज़), प्रो. एन.एस. नेगी (निदेशक, अनुसंधान) तथा प्रो. डी.आर. ठाकुर (डीन, संकाय जीव विज्ञान) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका को रेखांकित किया जो सतत वैज्ञानिक प्रथाओं को बढावा देने और विद्यार्थियों व शोधार्थियों में पर्यावरणीय जागरूकता विकसित करने में महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में विशिष्ट वक्ताओं में डॉ. गौरांग सिंधव (गुजरात विश्वविद्यालय), डॉ. राकेश सोनी (क्षेत्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशाला, धर्मशाला), डॉ. अरविंद साख्या (इग्नू, नई दिल्ली), डॉ. मनोरमा पत्री (केंद्रीय विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश), डॉ. सलीम रेशी (बाबा गुलाम शाह विश्वविद्यालय, राजौरी), डॉ. जितेन्द्र सिंह (रयात बाहरा विश्वविद्यालय, रूपनगर) और डॉ. देवप्रिय ग्राबडू (केंद्रीय विश्वविद्यालय, पंजाब) शामिल रहे।
सम्मेलन में देशभर से आए शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. आर.के. नेगी, सम्मेलन संयोजक, द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिन्होंने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
डॉ. राजेश जरयाल, आयोजन सचिव, ने बताया कि सम्मेलन में आठ राज्यों से 200 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। दो दिवसीय इस सम्मेलन में विभिन्न तकनीकी सत्र, शोध पत्र प्रस्तुतियाँ और पैनल चर्चाएँ आयोजित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य सतत भविष्य और सुदृढ़ पृथ्वी के निर्माण हेतु वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना है।
