शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि विट्ठलभाई पटेल एक महान स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि विधायी संस्थाओं के सशक्तिकरण तथा सुदृढ़ीकरण के अग्रदूत तथा महानायक थे। वे रविवार को दिल्ली विधानसभा द्वारा आयोजित दो दिवसीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के प्रथम दिन दिल्ली विधान मण्डल भवन के हॉल में “विट्ठलभाई पटेल: भारत के संविधान और विधायी संस्थाओं को आकार देने में उनकी भूमिका” विषय पर बोल रहे थे।
इस सम्मेलन का आयोजन मुख्य रूप से विठ्ठलभाई पटेल के केन्द्रीय असैम्बली के प्रथम चेयरमैन के रूप में शताब्दी वर्ष पूर्ण होने तथा दिल्ली विधान सभा के (केन्द्र व राज्य) के भी शताब्दी वर्ष पूर्ण होने की यादगार में किया गया। इस सम्मेलन का शुभारम्भ भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने किया। सम्मेलन को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उप-राज्यपाल विजय सक्सैना, संसदीय कार्यमंत्री भारत सरकार किरन रिजिजू, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने सम्बोधित किया, जबकि दिल्ली विधानसभा उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने सभी अतिथियों का सम्मेलन में भाग लेने के लिए आभार व्यक्त किया। इस सम्मेलन में जहां विधान परिषदों के चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन तथा सभी राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सचिव मौजूद थे, वहीं हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष विनय कुमार तथा सचिव विधानसभा यशपाल शर्मा भी मौजूद थे।
अपने सम्बोधन के दौरान कुलदीप पठानिया ने हिमाचल विधान मण्डल भवन जिसे कौंसिल चैम्बर कहा जाता है, की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसका निर्माण कार्य भी वर्ष 1925 में पूर्ण हुआ था तथा 20 अगस्त 1925 को तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड रीडिंग द्वारा उसका लोकार्पण किया गया। इस प्रकार इसे देश का प्रथम केन्द्रिय असैम्बली भवन होने का गौरव प्राप्त हुआ, जिसे विट्ठलभाई पटेल तथा मोती लाल नेहरू जैसी महान विभूतियों ने अपने विचारों तथा साहसिक कार्यप्रणाली से सुशोभित किया। उसी कौंसिल चैम्बर में विट्ठलभाई पटेल ने ब्रिटिश प्रतिनिधि को 2 मतों से पराजित कर देश के प्रथम निर्वाचित चेयरमैन होने का गौरव हासिल किया। कौंसिल चैम्बर में ग्रीष्मकालीन केन्द्रिय असैम्बली का आयोजन किया जाता था, जबकि दिल्ली विधान मण्डल भवन में भी तभी से केन्द्रीय असैम्बली का आयोजन किया जाता रहा है और उसके भी आज 100 वर्ष पूर्ण हुए हैं।
कुलदीप पठानिया ने कहा कि विट्ठलभाई पटेल देश के संवैधानिक और विधायी इतिहास के विख्यात एवं दूरदर्शी राजनेता रहे हैं, जिनके योगदान ने आधुनिक भारत के लोकतान्त्रिक चरित्र को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जो आज भी अनुकरणीय है। उन्होंने केन्द्रीय विधानसभा के प्रथम निर्वाचित अध्यक्ष के रूप में औपनिवेशक विधायिका को एक प्रतीकात्मक संस्था से भारतीय आत्म अभिव्यक्ति और राजनीतिक अभिव्यक्ति के एक सशक्त मंच के रूप में परिवर्तित किया।
कुलदीप पठानिया ने कहा कि विट्ठलभाई पटेल ने अपनी प्रखर कानूनी समझ, संविधान के प्रति अटूट प्रतिबद्वता और संसदीय प्रक्रिया में निुपणता के साथ ब्रिटिश बाधाओं के बावजूद उत्तरदायी शासन के पक्ष में कार्य किया। साथ ही विधायी संस्थाओं के सशक्तिकरण में अपनी अतुलनीय भूमिका निभाई। पठानिया ने कहा कि विट्ठलभाई पटेल ने गांधी जी के अहिंसा आत्मनिर्भरता जैसे दर्शनों से प्रेरित होकर स्वाराजवादी आन्दोलन को गति प्रदान की तथा मोतीलाल नेहरू, चितरंजन दास जैसे नेताओं की अंग्रेजों के विधान परिषदों में प्रवेश को असफल बनाने हेतु अंग्रेजों की नीतियों में बाधा डालने का काम किया तथा पूर्ण स्वशासन की मांग रखने की नींव रखी। पठानिया ने कहा कि उन्होंने ही सभा के अधिकार व स्वतंत्रता बढ़ाने का कार्य किया तथा इसके लिए अलग से एक सचिवालय की वकालत की तथा गैर सरकारी सदस्य के अधिकारों पर जोर दिया। उन्होंने ही सभा के कार्यों के लिए प्रथाओं और प्रक्रियाओं को निर्धारित कर उसकी कार्य पद्वती को आकार दिया।
उधर, अपने सम्बोधन के दौरान दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने धर्मशाला में आयोजित राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ भारत क्षेत्र-II सम्मेलन का जिक्र भी किया तथा विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया को बेहतरीन मेहमानवाजी तथा आतिथ्य सत्कार के लिए धन्यवाद दिया।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया 25 अगस्त को प्रात: 6 बजे नई दिल्ली से वायुमार्ग द्वारा चण्डीगढ़ को प्रस्थान करेंगे तथा दोपहर 2 बजे प्रस्तावित सदन की कार्यवाही का संचालन करने के लिए मौजूद रहेंगे।
