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शिमला।‌ भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य सहकारी बैंक के चेयरमैन खुशीराम बालनाटाह ने कहा है कि आज कांग्रेस का वजूद पूरे देश में मिट रहा है। देश की सबसे पुरानी पार्टी मानी जाने वाली कांग्रेस में आज न अच्छे नेता हैं, न नीति है और न ही नीयत है। परिवारवाद और भ्रष्टाचार की वजह से आज देश की जनता ने कांग्रेस को नकार दिया है। वे शनिवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे।
बालनाटाह ने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में तो कांग्रेस की दुर्गति जगजाहिर है ही, देश के कई राज्यों में तो कांग्रेस की हैसियत मुख्य विपक्षी दल की भी नहीं रह गई है। जहां एक-दो जगहों पर कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में मौजूद है, वहां की जनता ने भी उसे विपक्ष की भूमिका से भी सेवानिवृत्ति देने का मन बना लिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने जहाज में सभी को कप्तान बनाकर खुश करना चाहती थी। हिमाचल में अध्यक्ष के साथ साथ चार-चार वर्किंग प्रेजिडेंट बना दिए। लेकिन एक जहाज में जब हर कोई कप्तान होगा तो वो जहाज डूबने के अलावा और कहीं नहीं जा सकता। आलम यह है कि जिन्होंने अपना सारा जीवन कांग्रेस को दिया आज डूबते जहाज से बाहर भाग रहे हैं।
बालनाटाह ने कहा कि कल ही मीडिया में हेडिंग चल रही थी कि ‘गुलाम, कांग्रेस से आज़ाद’। राष्ट्रीय स्तर पर नेताओं की लंबी लिस्ट है जो कांग्रेस को हाथ जोड़कर अलविदा कह रहे हैं। गुलाम नबी आजाद ही नहीं, हाल ही में कांग्रेस छोड़ने वाले सभी नेताओं ने राहुल गांधी को अक्षम और चापलूसों से घिरा रहने वाला नेता बताया है। आज गुलाम नबी आजाद जैसे वरिष्ठ नेताओं को कांग्रेस पार्टी छोड़नी पड़ रही है। यह कांग्रेस पार्टी की दयनीय स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आजाद ने आरोप लगाए हैं कि पार्टी में सभी वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर दिया गया है। कांग्रेस से लोग टूट कर दूसरे दलों से अपना नाता जोड़ रहे हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस का कुनबा बिखर रहा है। कुछ महीने पहले कांग्रेस ने जंबो कार्यकारिणी बनाई। कोई नेता बगावत न करे, इसलिए सभी को बड़े-बड़े पद दे दिए गए। इसके बावजूद कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक पवन काजल, विधायक लखविंदर राणा ने पार्टी छोड़ दी। हालात ऐसे हैं कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता और जी-23 के लीडर रहे आनंद शर्मा ने भी संचालन समिति के अध्यक्ष पद को अलविदा कह दिया। अब वह भी खुलेआम बोल रहे हैं कि वो आत्म-सम्मान से समझौता नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यह सब साफ दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी के अंदर वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी के अंदर एकजुटता कहीं नहीं दिख रही। अपने ही नेता पार्टी पर विश्वास नहीं जता पा रहे हैं।
बालनाटाह ने कहा कि दिल्ली के समान ही हिमाचल में भी कांग्रेस पार्टी मां-बेटे के हाथ की कठपुतली बनकर रह गई है। यह सभी नेता परिवारवाद की राजनीति से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है। कांग्रेस का हर नेता अपनेआप को अध्यक्ष मानता है और हर नेता अपनेआप को मुख्यमंत्री के रूप में देखता है। अभी चुनाव हुए नहीं हैं और कांग्रेस का एक नहीं, दर्जनों नेता मुख्यमंत्री बनने के मुंगेरी लाल के सपने देख रहे हैं। कांग्रेस पार्टी में गुटबाजी किस कदर हावी है इसका उदाहरण आपने एक-दो दिन पहले देख ही लिया होगा। कांग्रेस को अपनी सात ब्लॉक कार्यकारणी भंग करनी पड़ी है।
जब इलेक्शन का दौर होता है तो पूरी पार्टी एक साथ चलकर तैयारी करती है, लेकिन कांग्रेस का एक नेता पूर्व की ओर जा रहा है तो दूसरा पश्चिम की ओर।
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बालनाटाह ने कहा कि कांग्रेस के अंदर ही इनके नेताओं के अलग-अलग दल बने हुए हैं। मुकेश अग्निहोत्री अलग दिशा में चले हुए हैं तो सुखविंद्र सिंह सुक्खू अलग दिशा में। कोई कहता है कि हम ये मुफ्त दे देंगे, हम वो मुफ्त दे देंगे। जबकि इनकी पार्टी के दूसरे नेता कहते हैं कि चादर देखकर ही पांव पसारने चाहिए। जो मुफ्त देने की बात कहते हैं वो 4 बार के विधायक हैं और जो कहते हैं फ्री की आदत अच्छी नहीं, वह एक बार के विधायक हैं। यह सभी इसलिए कि किसी तरह से सत्ता में वापसी हो जाए। एक बार बस कुर्सी मिल जाए फिर चाहे उसके लिए कैसा भी झूठ बोलना पड़े।

By admin

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