शिमला। संयुक्त किसान मंच की बैठक सोमवार को शिमला में आयोजित की गई। इसमें 5 अगस्त को शिमला में किसानों व बागवानों के संगठनों के आह्वान पर होने वाले प्रदर्शन की तैयारियों को लेकर चर्चा की गई। मंच ने सभी किसानों व बागवानों के संगठनों से आह्वान किया कि इस प्रदर्शन में किसानों व बागवानों की भारी संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि सरकार के समक्ष अपनी मांगें प्रभावशाली तरीके से रखी जाए तथा सरकार को इन मांगों को मानने के लिए बाध्य किया जाए।
इस बैठक में सभी संगठनों ने 5 अगस्त के सचिवालय के बाहर प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए गांव स्तर की बैठकें करने का निर्णय लिया तथा इसमें ज्यादा से ज्यादा किसानों व बागवानों की भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि बैठक में सरकार द्वारा 28 जुलाई, 2022 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में किसानों व बागवानों के संगठनों के साथ रखी गई बैठक, जिसमें सरकार ने संयुक्त किसान मंच को भी पत्र भेजकर आमंत्रित किया है, को लेकर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि मंच ने निर्णय लिया कि वह इस बैठक में भाग लेगा। यही नहीं इससे सम्बंधित सभी किसानों व बागवानों के संगठनों के प्रतिनिधि भी इसमें भाग लेंगे और इसके लिए एक मांग पत्र भी सरकार को दिया जाएगा। यह मांग पत्र सभी संगठनों से चर्चा कर बनाया गया और बैठक में 20 सूत्रीय मांगपत्र पर भी सहमति बनाई।
संयुक्त किसान मंच की मुख्य मांगें
1. सेब व अन्य फलों, फूलों व सब्जियों की पैकेजिंग में इस्तेमाल किये जा रहे कार्टन पर GST समाप्त किया जाए व ट्रे की कीमतों में की गई भारी वृद्धि वापिस ली जाए तथा इनकी गुणवत्ता पर भी सरकार नियंत्रण करे।
2. हिमाचल प्रदेश में भी कश्मीर की तर्ज पर मण्डी मध्यस्थता योजना (MIS) पूर्ण रूप से लागू की जाए तथा सेब के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) के तहत A, B व C ग्रेड के सेब के लिए क्रमशः 60 रुपये, 44 रुपये व 24 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य पर खरीद की जाये।
3. HPMC व Himfed द्वारा गत वर्षों में बागवानों से लिए गए सेब का बकाया भुगतान तुरन्त किया जाए।
4. सेब पर आयात शुल्क कम से कम 100 प्रतिशत किया जाए तथा इसे मुक्त व्यापार संधि (FTA) से बाहर किया जाए।
5. प्रदेश की विपणन मण्डियों में ए पी एम सी कानून को सख्ती से लागू किया जाए। मंडियों में खुली बोली लगाई जाए व किसान से गैर कानूनी रूप से की जा रही मनमानी वसूली जिसमें मनमाने लेबर चार्ज, छूट, बैंक डी डी व अन्य चार्जिज को तुरन्त समाप्त किया जाए।
6. किसानों से प्रदेश में विभिन्न बैरियरों पर ली जा रही मार्किट फीस वसूली पर तुरन्त रोक लगाई जाए। शोघी बैरियर को बन्द किया जाए तथा जिन किसानों से इस प्रकार की गैर कानूनी वसूली की गई है उन्हें इसे वापिस किया जाए।
7. प्रदेश की सभी मंडियों में सेब व अन्य सभी फसलें वजन के हिसाब से बेची जाए।
8. किसानों के आढ़तियों व खरीददारो के पास बकाया पैसों का भुगतान तुरन्त करवाया जाए तथा मंडियों में ए पी एम सी कानून के प्रावधानों के तहत किसानो को जिस दिन उनका उत्पाद बिके उसी दिन उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन खरीददार व आढ़तियों ने बकाया भुगतान नहीं किया है उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए।
9. खाद, बीज, कीटनाशक, फंफूंदीनाशक व अन्य लागत वस्तुओं पर दी जा रही सब्सिडी को पुनः बहाल किया जाए और सरकार कृषि व बागवानी विभागों के माध्यम से किसानों व बागवानों को उचित गुणवत्ता वाली लागत वस्तुएं सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाए।
10. कृषि व बागवानी के लिये प्रयोग में आने वाले उपकरणों स्प्रेयर, टिलर, एन्टी हेल नेट आदि की वर्षों से लंबित सब्सिडी तुरन्त प्रदान की जाए।
11. प्रदेश में भारी ओलावृष्टि व वर्षा, असामयिक बर्फबारी, सूखा व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से किसानों व बागवानों को हुए नुकसान का सरकार उचित मुआवजा प्रदान कर राहत प्रदान करे।
12. किसानों व बागवानों के द्वारा विभिन्न बैंकों व संस्थाओं से लिये गये ऋण की माफी की जाए तथा बैंकों द्वारा जारी वसूली के नोटिस तुरन्त प्रभाव से वापिस लिए जाए।
13. प्रदेश में सभी जिलों में आधुनिक सुविधाओं से लैस विपणन मण्डियों का विकास व विस्तार किया जाए। तथा पुरानी मंडियों के विस्तार व आधुनिकीकरण के लिए योजना बनाकर इनका कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
14. प्रदेश में बागवानी विकास के लिए बागवानी बोर्ड का गठन कर इसमें बागवानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
15. सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) तय कर इसे कानूनी रूप से लागू किया जाए।
16. प्रदेश में धान, गेहूं, मक्की व अन्य फसलों की खरीद के लिए मंडिया स्थापित कर न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) के तहत खरीद करे।
17. प्रदेश में अदानी व अन्य कंपनियों के CA स्टोर में लिये जाने वाले सेब के दाम तय करने व निगरानी के लिए बागवानी विश्वविद्यालय, बागवानी विभाग के विषय विशेषज्ञ व बागवानों की एक कमेटी का तुरन्त गठन किया जाए तथा इसके निर्माण के समय शर्तों के अनुसार बागवानों को 25 प्रतिशत सेब रखने के प्रावधान को तुरंत सख्ती से लागू किया जाए।
18. किसान सहकारी समितियों को स्थानीय स्तर पर CA स्टोर बनाने के लिए सरकार द्वारा 90 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाए।
19. प्रदेश में सरकार भूमि अधिग्रहण,2013 कानून (पुनर्स्थापना, पुनर्वास व चार गुणा मुआवजा) को लागू करे।
20. बढ़ती महंगाई पर रोक लगाई जाए तथा मालभाड़े में की गई वृद्धि वापिस ली जाए।
संयुक्त किसान मंच सरकार को करीब एक वर्ष से अधिक समय से अपनी मांगों को लेकर बार बार ज्ञापन दे रहा है परन्तु सरकार ने अभी तक इस पर कोई भी गौर नही किया है। परन्तु 11 जुलाई व 20 जुलाई के किसानों व बागवानों के रोहड़ू, ठियोग व प्रदेश के अन्य हिस्सों में आंदोलन के दबाव के चलते सरकार अब बातचीत के लिए तैयार हुई है। सरकार देश व प्रदेश में कृषि व बागवानी के बढ़ते संकट को ध्यान में रखते हुए उपरोक्त मांगो को मानकर किसानों व बागवानों के हितों की रक्षा कर अपना दायित्व निभाए। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि सरकार इन मांगों पर अमल नहीं करती है तो संयुक्त किसान मंच सभी किसानों व बागवानों के संगठनों को साथ लेकर अपना आंदोलन तेज करेगा और तब तक जारी रखेगा, जब तक सरकार इन सभी मांगों को नहीं मान लेती है।
