शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी ने ‘अग्निपथ’ योजना को पूरी तरह से खारिज किया है। सीपीआईएम ने इसे भारत के राष्ट्रीय हितों के लिए हानिकारक करार दिया है। उसके मुताबिक पेशेवर सशस्त्र बलों को चार साल की अवधि के लिए ‘अनुबंध पर सैनिकों’ की भर्ती करके नहीं चलाया जा सकता है। पेंशन के पैसे बचाने के लिए लागू की गई यह योजना देश के पेशेवर सशस्त्र बलों की गुणवत्ता और दक्षता से समझौता है। उसकी मांग है कि इस ‘अग्निपथ योजना’ को तुरन्त रद्द किया जाए तथा राष्ट्र हित में सेना में पुरानी भर्ती प्रक्रिया पर तुरन्त भर्तियां की जाए।
सीपीआईएम के राज्य सचिव डॉ. ओंकार शाद ने कहा कि पिछले दो साल से भारतीय सेना में कोई भर्ती नहीं हुई है। हर वर्ष सेना से करीब 60 हजार सैनिक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। देश व प्रदेश में आज लाखों युवा देश सेवा की भावना रखते हुए सेना में भर्ती के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। अग्निपथ योजना ऐसे लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सशस्त्र बलों में नियमित सैनिकों की भर्ती के बजाय अनुबंधित सैनिकों की भर्ती की यह योजना उनके लिए चार साल के बाद रोजगार की अन्य कोई संभावना नहीं छोड़ती। उन्होंने कहा कि यह हमारे पहले से ही गंभीर तनाव में चल रहे सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरनाक प्रभाव डालेगा।
डॉ. शाद ने कहा कि देश के युवाओं को नौकरी की न्यूनतम सुरक्षा के बिना ही सर्वोच्च बलिदान देने के लिए तैयार रहने का आह्वान करना एक गंभीर अपराध है। देश के विभिन्न हिस्सों में स्वतःस्फूर्त विरोध इस योजना के खिलाफ गुस्से को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आज देशभर में युवा इस अग्निपथ योजना का विरोध कर रहा है और सेना की भर्ती पुरानी प्रक्रिया के अनुसार करने की मांग कर रहा है। इसको लेकर विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर उग्र प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार इस पर मौन बैठी है। यदि यह प्रदर्शन और अधिक उग्र होंगे तो इसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करे और इस अग्निपथ योजना को रद्द करे और देश में अमन चैन का वातावरण बनाने का अपना दायित्व निभाए।
