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शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने शिमला शहर के डाउनडेल क्षेत्र में एक छः वर्ष के बच्चे को दिवाली की रात को तेंदुए द्वारा घर के बाहर से उठाने व उसकी मौत की दुखद घटना को लेकर सरकार व वन विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने सरकार से मारे गए बच्चे के प्रभावित परिवार को तुरंत 10 लाख रुपए मुआवजे के रूप में देने की मांग की है। साथ ही वन विभाग इस नरभक्षी तेंदुए को तलाश कर इसको मारने के लिए ठोस कदम उठाने तो कहा है।

बुधवार को फिर से सीपीएम की एक टीम डाउन डेल पहुंची थी। इसमें जिला सचिव संजय चौहान, राज्य कमेटी सदस्य विजेंद्र मेहरा, फालमा चौहान, जगत राम, लोकल कमेटी शिमला के सचिव बाबू राम, किशोरी डडवालिया, अनिल व प्रकाश शामिल थे। उन्होंने डाउन डेल में जाकर बच्चे के परिजनों व क्षेत्र के अन्य लोगों की से भी मुलाकात की। इस दौरान परिजनों व क्षेत्रवासियों ने बताया कि अभी भी इस क्षेत्र में तेंदुए को देखा गया है, परन्तु सरकार व वन विभाग ने अभी तक कोई भी कार्यवाही नहीं की है और इस घटना के बाद से ही क्षेत्रवासियों में दहशत का माहौल है। 

माकपा के जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुए के देखे जाने की घटना की सूचना वन विभाग को दी गई थे, लेकिन फिर भी वन विभाग ने इस पर तेंदुए को पकड़ने या मारने के लिए कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि वन विभाग समय रहते कार्रवाई करता तो शायद इस मासूम बच्चे की जान को बचाया जा सकता था। आज इस दुखद घटना के पश्चात भी केवल वन विभाग के अधिकारी या कर्मचारी महज़ औपचारिकता पूरी करने के लिए यहां आते हैं और चले जाते हैं और कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। चौहान ने कहा कि इस घटना से 3 माह पूर्व इसी के साथ लगते कनलोग क्षेत्र से भी एक बच्ची को बाघ उठाकर ले गया था और उसे मारने की दुखद घटना सामने आई थी। परन्तु वन विभाग व सरकार ने इस घटना को संजीदगी से नहीं लिया और अब इस बच्चे को डाउन डेल में तेंदुए ने शिकार बनाया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार व वन विभाग समय रहते कदम उठाता तो शायद इस बच्चे की जान को बचाया जा सकता था।

माकपा नेता ने कहा कि सरकार व वन विभाग की लचर व्यवस्था इससे स्पष्ट हो जाती है कि आज डाउन डेल में बच्चे के तेंदुए के हमले में मारे जाने को लगभग एक सप्ताह बीत गया है, परन्तु सरकार व वन विभाग अभी तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठा पाई है। न तो इस तेंदुए को नरभक्षी घोषित किया गया है और न ही इसको ढूंढने और पकड़ने के लिए कोई कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से शिमला शहर व इसके साथ लगते कई क्षेत्रों में तेंदुए को आमतौर पर घूमते हुए देखा गया है, जिससे शहरवासियों में दहशत का माहौल बना हुआ है। चौहान ने कहा कि उनकी मांग है कि वन विभाग व नगर निगम शहर के जंगल के साथ लगते क्षेत्रों में बाड़बंदी करे, ताकि तेंदुए व अन्य वन्य प्राणी रिहाइशी इलाकों में न आ सके तथा इन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटों का उचित प्रबंध किया जाए। इसके साथ ही वनों व वनों के साथ लगते रिहायशी इलाकों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में जंगली जानवरों से हमलों पर रोक लगाई जा सके और शहरवासियों के जीवन सुरक्षित हो पाए।  

By admin

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