Spread the love

शिमला। किसानों-बागवानों की समस्याओं को लेकर किसान संगठनों के संयुक्त किसान मंच के आह्वान पर सोमवार को राज्यभर में धरना-प्रदर्शन किए। इसके तहत राजधानी शिमला से लेकर उपमंडल स्तर तक किसानों व बागवानों ने धरना प्रदर्शन कर केंद्र व हिमाचल सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर अपनी एकता का परिचय दिया। साथ ही अपनी ताकत भी दिखाई। किसान संगठनों ने मांग की है कि सभी फसलों के लिए एमएसपी लागू किया जाए। उनकी मांग है कि ए, बी व सी ग्रेड के सेब के लिए एमआईएस लागू किया जाए और सभी मंडियों में एपीएमसी एक्ट लागू किया जाए। राजधानी शिमला में विभिन्न संगठनों ने मिलकर शेर-ए-पंजाब से जुलूस निकालते हुए उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया और उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। मंच के घटक सदस्य हिमाचल किसान सभा के महासचिव डॉ. ओंकार शाद ने कहा कि प्रदेश की सरकार पूंजीपतियों के साथ सांठ-गांठ करके किसानों को लूटने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एपीएमसी भी किसानों के हक बचाने में नाकाम है। सरकार की किसान-बागवान विरोधी नीतियों की वजह से प्रदेश की 5 हज़ार करोड़ की सेब की आर्थिकी को ग्रहण लग गया है। सरकार की नीतियों की मार सबसे ज्यादा मार छोटे बागवानों पर पड़ रही है। डॉ. ओंकार शाद ने कहा कि लगत मूल्य कई गुणा हो चुका है। दवाई, खाद, यातायात, भण्डारण, पैकेजिंग हर चीज़ के दाम बढ़ चुके हैं। खाद में नौ गुणा और दवाइयों में 20 गुणा तक की मूल्यवृद्धि हो चुकी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह बागवान को बचाने का काम करे न कि उजाड़ने का काम करे।
उधर, हिमाचल किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि भाजपा हमेशा एक देश एक विधान का राग तो अलापती है, लेकिन किसानों-बागवानों को समर्थन मूल्य देने में भेदभाव करती है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पिछले दो सालों से 60 रुपए, 44 रुपए और 24 रुपए के हिसाब से मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सेब की सरकारी खरीद हो रही है, जबकि हिमाचल में सरकार सिर्फ कल्ड सब ही खरीदती है, जिसकी कीमत 9.50 रुपए प्रति किलो है। लेकिन अफसोस की बात यह कि यह पैसा भी सरकार बागवानों को समय पर नहीं देती। डॉ. तंवर ने कहा कि सब्ज़ी उत्पादक भी इसी तरह से खस्ता हालत में हैं। हर साल एक न एक सब्ज़ी का शून्य दाम मिलता है। टमाटर, गोभी, शिमला मिर्च, बीन में कई बार इतना कम मूल्य मिलता है, जिससे मंडी तक पहुंचाने का खर्च भी पूरा नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि बात-बात पर केरल से अपनी तुलना करने वाली हिमाचल सरकार को ज्ञात होना चाहिए कि केरल ने फल-सब्ज़ी के अपने 30 उत्पादों के लिए न्यूनतम खरीद मूल्य निर्धारित किया है। इसका लाभ यह हुआ है कि केरल के किसान का उत्पाद अब मण्डी में भी अच्छे दामों में बिक रहा है। आढ़तियों को मजबूर होकर किसानों को सही दाम देना पड़ रहा है।
प्रदर्शन में हिमाचल किसान सभा के राज्य कोषाध्यक्ष सत्यवान पुण्डीर, गोविन्द चतरांटा, कृष्णानन्द, जयशिव ठाकुर, सुरेश, डॉ. रीना सिंह, सीमा चौहान, हिमी देवी, अनिल ठाकुर, गुलाब सिंह नेगी, अनिल पंवर, जगमोहन ठाकुर, सुनील वशिष्ठ, डॉ. विजय कौशल, पवन शर्मा, बलबीर पराशर सहित किसानों ने भाग लिया। 

ये हैं किसान संगठनों की मांगें
संयुक्त किसान मंच की मांग है कि सभी फसलों के लिए समर्थन मूल्य घोषित किया जाए। कश्मीर की तज़ पर मंडी मध्यस्थता योजना के तहत ए, बी व सी ग्रेड के सेब का मूल्य घोषित  किया जाए। एपीएमसी कानून को सख्ती से लागेू किया जाए और किसानों के उत्पाद की बिक्री का पैसा उसी दिन सुनिश्चित करवाया जाए। मंच ने यह मांग भी की है कि आढ़तियों के पास फंसे बागवानों के पैसे का भुगतान करवाया जाए। अदानी सहित सभी सीए स्टोर में निर्माण के समय की शर्तों के अनुसार बागवानों को 25 प्रतिशत सेब रखने का प्रावधान सुनिश्चित करवाया जाए। किसान सहकारी समितियों को सीए सटोर बनाने के लिए सरकार 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाए। सेब, अन्य फलों व फूलों की पैकेजिंग में इस्तेमाल किए जा रहे कार्टन व ट्रे की कीमतों की वृद्धि को वापिस लिया जाए। सूखा, ओलावृष्टि, बरसात व बर्फ से बर्बाद हुई फसलों के लिए सरकार मुआवज़ा दिया जाए और सेब व अन्य फसलों को वज़न के हिसाब से खरीदने के लिए मंडियों को आदेश दिए जाएं। साथ ही एचपीएमसी और हिमफेड द्वारा पिछले वर्षों में खरीदे गए सेब का भुगतान तुरन्त किया जाए। खाद, बीज, दवाइयों, कीटनाशक, फफूंदनाशक पर सब्सिडी को बहाल किया जाए और कृषि उपकरणों और हेलनेट की बकाया सब्सिडी तुरंत दी जाए। 

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *