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शिमला। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज यहां प्रदेश के स्वयं सहायता समूहों को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह कोविड मरीजों के परिवारों की सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि एक परिवार के सभी सदस्य संक्रमित हो जाते हैं तो इस स्थिति में स्वयं सहायता समूह ऐसे परिवारों को उनके पशुधन, कृषि गतिविधियों आदि कार्यों में सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों द्वारा उनकी आय में वृद्धि  के लिए की गई पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगी ताकि उनके उत्पादों को बेहतर बाजार मिल सके।
जयराम ठाकुर ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री एक बीघा योजना’ ग्रामीण महिलाओं की कृषि से आय बढ़ाने में वरदान सिद्ध हुई है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूह की कोई भी महिला, जिनके पास मनरेगा जाॅब कार्ड हो, इस योजना के तहत एक लाख रुपये तक का लाभ ले सकती है। उन्होंने कहा कि इस योजना के शुरू होने के उपरान्त अब तक महिलाओं के लिए 10364 कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिन पर 13.90 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान इस योजना से मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं को मदद मिली है। उन्होंने कहा कि इस महामारी के दौरान स्वयं सहायता समूहों को प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए भी आगे आना चाहिए, क्योंकि कोरोना कर्फ्यू के कारण उन्हें रोजगार पाने में कठिनाई हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की लगभग आधी आबादी हैं, इसलिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना समाज के समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण दिया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में सम्पन्न पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों में महिलाओं ने 60 प्रतिशत सीटें जीती हैं। उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों ने न केवल ग्रामीण महिलाओं की आर्थिकी को मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह महिला सशक्तिकरण सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार स्वयं सहायता समूहों को उनके उत्पादों को बढ़ावा देने और उनके उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में हर संभव सहायता प्रदान करेगी ताकि उन्हें उत्पादों के अच्छे दाम मिल सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश आज कोविड के कठिन दौर से गुजर रहा है। इस संकट की घड़ी में हर नागरिक का यह कत्र्तव्य बनता है कि मुसीबत में फंसे लोगों की मदद करें। उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों को कोविड मरीजों वाले परिवारों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी एसओपी और दिशा-निर्देशों के संबंध में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शिक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाएं सामाजिक और धार्मिक समारोहों में लोगों को सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए प्रेरित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों से आग्रह किया कि वे लोगों को स्थानीय देवताओं और धार्मिक कार्यों से संबंधित समारोहों को स्थगित करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को संकट की घड़ी में जरूरतमंदों को फेसमास्क और सैनिटाइजर उपलब्ध करवाने चाहिए।

 मंडी जिले के सदर मंडी खण्ड के शिव शम्भू स्वयं सहायता समूह की कमलेश कुमारी, सिराज खण्ड की अपराजिता स्वयं सहायता समूह की सोमा देवी, जिला ऊना के हरोली खण्ड के आन्या स्वयं सहायता समूह की प्रोमिला कालिया, लाहौल स्पीति की मानदासी, हमीरपुर जिले के नादौन खण्ड की न्यू आजीविका की रीना चंदेल और जिला कुल्लू के नगर खण्ड के पंचवीर स्वयं सहायता समूह की उषा ने इस अवसर पर अपने विचार सांझा किए।
इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने भी अपने विचार सांझा किए। निदेशक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज ललित जैन ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और बैठक का संचालन किया। मुख्यमंत्री के सलाहकार डाॅ. आरएन बत्ता, सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संदीप भटनागर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शिमला से मुख्यमंत्री के साथ इस अवसर पर उपस्थित थे।

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