शिमला। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ. आरजी आनंद ने अधिकारियों से हमीरपुर जिला को बाल मित्र जिला बनाने के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को निर्देश दिए कि जिला में विभिन्न स्तरों पर ज्वर से पीड़ित बच्चों के लिए पृथक ओपीडी सुविधा आरम्भ करने का प्रयास करें। उन्होंने जिला में टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में किए गए प्रयासों पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग शिशु मृत्यु दर में और कमी दर्ज करने के लिए इसी तरह के समर्पित प्रयास करें। वे वीरवार को हमीरपुर में जिले में बाल अधिकारों के क्रियान्वयन की समीक्षा कर रहे थे। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा वंदना योगी भी इसमें विशेष रूप से उपस्थित थी।
डॉ. आरजी आनंद ने कहा कि आयोग केन्द्र एवं राज्य सरकारों के सहयोग से यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि विभिन्न कारणों से उपेक्षित एवं शोषित बच्चों को सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए समय पर समुचित सहायता उपलब्ध करवाई जा सके। आयोग सरकार के सहयोग से सभी बच्चों को एक समान अधिकार प्रदान करने और उन्हें विपरीत परिस्थितियों से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना, बाल श्रम की प्रवृति पर अंकुश, शिक्षा के अधिकार अधिनियम का पूर्णतया पालन तथा बाल संरक्षण के लिए कार्यान्वित किए जा रहे कानूनों की अनुपालना सुनिश्चित करवाना आयोग का ध्येय है। आयोग बाल मनोविज्ञान और समाज विज्ञान के स्थापित नियमों का पालन भी सुनिश्चित बना रहा है।
डॉ. आरजी आनंद ने कहा कि कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान बच्चों को परामर्श एवं सहायता उपलब्ध करवाने के लिए आयोग ने ‘ संवेदना’ नाम से टॉल-फ्री हेल्पलाइन नम्बर सेवा आरम्भ की है। इस हेल्पलाइन नम्बर 1800-121-2830 पर विभिन्न भारतीय भाषाओं में कोविड-19 से सम्बन्धित परामर्श, मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक सहायता ऐसे बच्चों को उपलब्ध करवाई जा रही है जो किसी न किसी रूप में कोविड-19 से पीड़ित रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयोग ने सशस्त्र सेनाओं के शहीदों के बच्चों को परामर्श एवं सहायता प्रदान करने के लिए सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से एक अन्य टेली-काउन्सिलिंग सुविधा ‘सहारा’ आरम्भ की है। यह सुविधा दूरभाष नम्बर 1800-1-236-236 पर निःशुल्क उपलब्ध है। इसी प्रकार लापता बच्चों को ढूंढने के लिए देशभर में ऑप्रेशन ‘मुस्कान’ कार्यान्वित किया जा रहा है।
डॉ. आरजी आनंद ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि जिला के निजी स्कूलों का नियमित निरीक्षण कर शिक्षा के अधिकार अधिनियम की अनुपालना सुनिश्चित करें। उन्होंने बाल श्रम की कुप्रथा को समाप्त करने के लिए जिला में स्थापित विभिन्न उद्योगों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश श्रम विभाग को दिए तथा कहा कि इसमें बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण अधिकारी एवं पुलिस प्रशासन का भी सहयोग लें। उन्होंने निःशुल्क हेल्पलाइन नम्बर 1098 पर बच्चों के सम्बन्ध में प्राप्त कॉल पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए और जिलाधीश के समक्ष इस बारे में नियमित अंतराल में प्रतिवेदन प्रेषित करने को कहा।
उपायुक्त देबश्वेता बनिक ने आयोग के सदस्य का स्वागत किया और आश्वस्त किया कि आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिला में बाल संरक्षण से संबंधित त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। बैठक में पुलिस अधीक्षक गोकुलचंद्रन कार्तिकेयन, अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी जितेंद्र सांजटा, संयुक्त निदेशक महिला एवं बाल विकास भावना सहित विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी उपस्थित थे।
