काजा।लाहौल-स्पीति जिले की स्पीति घाटी के सगनम में स्नो फेस्टिवल का आयोजन किया गया। इस मौके पर जन शिकायत निवारण, जनजातीय विकास, तकनीकी शिक्षा, एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. राम लाल मरकंडा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि स्नो फेस्टिवल का उद्देश्य लाहौल स्पीति के संस्कृति को पर्यटन का हिस्सा बनाना है, ताकि हमारे लोगों को रोज़गार भी मिले और आर्थिकी भी मजबूत हो। उन्होंने कहा कि छंगफुत, लोसर, छंका, बूचेन, दाछंग, नमगेन त्यौहार यहां मनाए जाते हैं।
डॉ. मारकंडा नो कहा कि अब हर वर्ष इसी तरह स्नो फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा। यहां के लोगों ने कम समय काफी बेहतरीन कार्यक्रम आयोजित किया। यहां की प्रदर्शनी में हर वस्तु आकर्षित लगी पर्यटक यही सब देखना चाहते हैं। लोगों को सहभागिता के बिना कार्यक्रम सफल करना मुश्किल होता है। स्नो फेस्टिवल स्थानीय लोगों का फेस्टिवल है। लाहौल और स्पीति में हर गांव इस फेस्टिवल में हिस्सा ले रहे हैं। स्पिती में आइस हॉकी का प्रयास दो साल पहले किया गया था। इस बार हमारे स्पीति की लड़कियों ने ब्रॉन्ज मैडल राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार आइस हॉकी में लाया है। डॉ. मारकंडा ने कहा कि अतरगु-भावा-मुद सड़क का कार्य जल्द शुरू करवाया जाएगा। उनका कहना था कि तेलिंग-मुद के बीच पुल का निर्माण करवाया जाएगा। वहीं, राज व मिनसर गांव वालों की सड़क इस वर्ष बनकर तैयार होगी। उन्होंने कहा कि पिन घाटी में आइस रिंक तैयार किया जाएगा, ताकि यहां के बच्चे इस खेल के उत्कृष्ठ खिलाड़ी बन सकें। कार्यक्रम में एडीएम ज्ञान सागर नेगी ने स्नो फेस्टिवल के तहत हो रही विभिन्न गतिविधियों को जानकारी दी। कार्यक्रम में स्थानीय अधिकारियों के अलावा टीएसी सदस्य लोबजंग, पालजोर बीडीसी अध्यक्ष कुमारी डोलकर, बीडीसी काजा छैरिंग दिकित, ग्राम पंचायत प्रधान सगनम दिचेन जंगमों, दोरजे तंडूप कुंगरी प्रधान आदि मौजूद थे।

ये कार्यक्रम किए गए पेश
इस फेस्टिवल में गुलिंग गांव के कलाकारों ने हाथी नृत्य, कुंगरी गांव ने टशी नृत्य, तेलिंग गांव ने डेकर, सगनम गांव ने खर नृत्य, अप्पर गुलिग गांव ने दा ट्यू नृत्य, भर गांव ने टासोर नृत्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सगनम के छात्रों ने फैशन शो और लोक नृत्य प्रस्तुत किया। शोन नृत्य वाईएमसी खर और मुद गांव ने लोक नृत्य प्रस्तुत किया। इस फेस्टिवल में तीरंदाजी, पारम्परिक वस्तुओं की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। प्रदर्शनी में याक की ऊन से गलीचे, बोरिया बनाने की विधि दिखाई गई। छोलो खेल की प्रतियोगिता भी प्रदर्शित की गई। कई वर्ष पुराने पत्थर के बर्तन इस दौरान आकर्षण का केंद्र रहे। लकड़ी से हल, कृषि औजार भी स्टाल में दिखाए गए। ऊन से पुराने समय में महिलाएं कपड़े कैसे बनाती थी, वह भी प्रदर्शनी का अहम हिस्सा रहा। इसके अलावा, बुचेन डांस के कलाकारों ने अपना स्टाल लगाया था।
