शिमला। राष्ट्रीय किसान दिवस के मौके पर कई किसान संगठनों ने केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ राज्यभर में धरना-प्रदर्शन किए। किसान संगठनों के आह्वान पर बुधवार को किसान संघर्ष समिति, किसान सभा व अन्य संगठनों ने प्रदर्शन के बाद स्थानीय प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजे। दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए इन संगठनों ने मांग की कि तीनों किसान बिलों को निरस्त करने की मांग को स्वीकार किया जाए। साथ ही इस किसान आंदोलन को बातचीत कर समाप्त करवाया जाए।
किसान संघर्ष समिति के महासचिव संजय चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार ने चहेते उद्योगपतियों और अब कृषि कारोबार से जुड़ी कंपनियों के दबाव में आकर ये तीनों किसान विरोधी काले क़ानून लाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इन बिलों के माध्यम से भविष्य में किसानों को मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य को समाप्त कर कॉरपोरेट घरानों के माध्यम से ठेका खेती को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि किसान पिछले 23 दिनों से कड़ाके की ठंड में आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार, किसानों की बात सुनने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है। इसके उलट सरकार इन तीनों कृषि क़ानूनों को जायज़ ठहराने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। उनका कहना था कि इससे सरकार का किसान विरोधी चेहरा स्पष्ट हुआ है।
ज्ञापन में इन मांगों को किया गया सम्मिलित
1. तीन कृषि क़ानूनों को केंद्र सरकार निरस्त करे व विद्युत संशोधन अधिनियम, 2020 को तुरंत वापिस ले।
2.राज्य सरकार 2014 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हिमाचल की जनता को किये गए वायदों के अनुसार प्रदेश के उत्पादों सब्ज़ियों, फूल, मसलों, ऊन, दूध, शहद आदि पर डॉ. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक समर्थन मूल्य की घोषणा करे।
3. किसानों व बागवानों के खरीदारों व आढ़तियों के पास फंसे पैसों का भुगतान तुरंत करवाया जाए व दोषी खरीददारों व आढ़तियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जाए।
4. किसानों व बागवानों को सरकार द्वारा कृषि व बागवानी विभाग से जो सब्सिडी प्रदान की जाती थी उसको जारी रखे व इसको समाप्त करने के निर्णय को तुरंत वापस ले। किसानों व बागवानों की पिछले लंबे समय से लंबित सब्सिडी उनको तुरंत दी जाए।
5. एचपीएमसी व हिमफेड द्वारा बागवानों से खरीदे सेब का बकाया भुगतान तुरंत नकद में किया जाए।
6.प्रदेश सरकार मक्की सहित फलों और सब्जियों के लिए सरकारी क्षेत्र में भंडारण केन्द्र, शीत भंडारण केंद्र व प्रसंस्करण इकाइयों का निर्माण करे।
