शिमला। हिमाचल किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने आरोप लगाया है कि किसानों के भारत बंद से घबराकर भाजपा व आरएसएस ने अपने सभी संगठनों को किसानों के खिलाफ दुष्प्रचार और किसानों के बीच फूट डालने के लिए सक्रिय कर दिया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के ज़रिये अफवाहें और दुष्प्रचार अचानक तेज हो गया है। भाजपा, आरएसएस और इसके किसान, व्यापारी संगठनों के वर्तमान किसान बिलों के समर्थन में बयान और रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा कभी भी किसान हितैषी न थी और न ही रहेगी। उनका कहना था कि भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा समर्थित व्यापार मंडल के अध्यक्ष और भारतीय किसान संघ के महामंत्री द्वारा दिये गए बयानों से भाजपा की खोटी नीयत का पर्दाफाश हो गया है।
डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने भाजपा राज्याध्यक्ष के उस बयान को हास्यस्पद बताया कि किसान गुमराह होकर आन्दोलनरत हैं। यानी भाजपा यह साबित करना चाहती है कि लाखों किसान नासमझ हैं और केवल भाजपा सरकार और भाजपा के कार्यकर्ता ही समझदार हैं। डॉ. तंवर ने कहा कि बंद के ठीक एक दिन पहले संघ और भाजपा का सक्रिय होना और उलजुलूल बयानबाज़ी करना उनकी हड़बड़ाहट और घबराहट को साफ दर्शा रहा है। किसानों के हौसलों के आगे सरकार और इसका साजिशतन्त्र असफल हो चुका है।
डॉ. कुलदीप तंवर ने कहा कि सरकार और भाजपा जब किसी भी साजिश के तहत किसानों की एकता को नहीं तोड़ पाई तो अब उन्हें प्रदेशों के आधार पर बांटना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार और भाजपा कितनी भी कोशिश कर ले न तो किसान उनके झांसे में आने वाले हैं और न ही व्यापारी वर्ग उनका साथ देने वाला है। उन्होंने कहा कि व्यापारी भी समझ चुके हैं कि मोदी सरकार खुदरा बाज़ार को खत्म करके इसके भण्डारण को अडानी और व्यापार अंबानी के हवाले करना चाहती है। व्यापारी जानता है कि किसान बिलों का फर्क सिर्फ खेती किसानी पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि करोड़ों छोटे और मंझोले व्यापारी भी बर्बाद हो जाएंगे। इसलिए व्यापारियों ने भी बंद का पूरा समर्थन किया है।
डॉ. तंवर ने कहा कि देशभर से लगातार किसान धरने पर बैठे किसानों के समर्थन में भारी जत्थेबंदियों में बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। हिमाचल से भी दूसरे चरण में शिमला, सोलन, सिरमौर से किसान 7 दिसम्बर की शाम दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं और बिलासपुर, ऊना के किसान आठ दिसम्बर की सुबह रवाना होंगे।
