शिमला। माकपा ने राजधानी शिमला की जनता को नगर निगम द्वारा 8-9 माह के पानी के भारी भरकम बिल देने की कड़ी निंदा की है। माकपा ने नगर निगम से मांग की है कि इन भारी भरकम बिलों को तुरंत वापिस लिया जाए। यही नहीं, कोविड-19 महामारी के कारण संकट के चलते इस समय के पानी, कूड़ा उठाने की फीस, प्रॉपर्टी टैक्स व अन्य बिलों में छूट प्रदान की जानी चाहिए। माकपा के राज्य सचिव मंडल सदस्य व नगर निगम शिमला के पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि कोविड-19 के कारण अधिकांश लोगों के रोज़गार व कारोबार पर गंभीर संकट के चलते इनकी आर्थिक दशा अच्छी नहीं है और आज लोग हजारों व लाखों रुपए के भारी भरकम पानी व अन्य बिलों का भुगतान करने में बिल्कुल असमर्थ है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण का प्रदेश व शिमला शहर में बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार व नगर निगम द्वारा इस प्रकार का आर्थिक बोझ डालकर इस संकट को और अधिक गहरा किया जा रहा है।
चौहान ने कहा कि कोविड-19 के कारण पिछले लगभग 8 महीने में देश, प्रदेश व शिमला शहर में अधिकांश दिहाड़ी मज़दूरी तथा छोटा व अन्य कारोबार करने वाले लोगो का रोज़गार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इस कारण आज भी इनका रोजी रोटी का संकट बरकरार है। इस संकट के दौर में सरकार व नगर निगम से इनको कोई भी राहत प्राप्त नहीं हुई है। इसके विपरीत सरकार व नगर निगम शिमला ने पानी, बिजली, बस किराया, प्रॉपर्टी टैक्स, कूड़ा इकट्ठा करने की फीस आदि हर प्रकार के कर व फीस में वृद्धि कर जनता पर और अधिक टैक्स का बोझ डाल दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पास कोविड-19 को निपटने के लिए करोड़ों रुपए आए हैं, लेकिन राज्य सरकार इसमें से जनता को कोई भी आर्थिक या अन्य रूप से राहत प्रदान नहीं कर पाई है। संजय चौहान ने कहा कि माकपा ने कई बार प्रदेश की सरकार व नगर निगम शिमला से इस महामारी से पैदा हुए संकट के कारण बिजली, पानी, प्रॉपर्टी टैक्स, कूड़ा इकट्ठा करने की फीस आदि माफ कर राहत प्रदान करने की मांग की गई, लेकिन सरकार व नगर निगम ने इसे अनसुना किया। आज तक किसी को भी कोई राहत प्रदान नहीं की गई। उन्होंने कहा कि भाजपा जबसे प्रदेश सरकार व नगर नगर शिमला में सत्तासीन हुई है, उस समय से ही पानी, बिजली, बस किराया, प्रॉपर्टी टैक्स, कूड़ा उठाने की फीस आदि सेवाओं में कई गुणा वृद्धि कर जनता पर आर्थिक बोझ लादने का काम हो रहा है। इसके साथ इन सेवाओं के निजीकरण को बढ़ावा देने का काम कर रही है। इसका ज्वलंत उदाहरण सरकार के दबाव में आकर वर्तमान नगर निगम शिमला ने शहर के पानी की व्यवस्था को पूर्व नगर निगम द्वारा लम्बे संघर्ष के बाद नगर निगम के अधीन बनाए गए ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई एंड सीवरेज सर्कल को समाप्त कर विश्वबैंक व सरकार के दबाव में आकर शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड कंपनी का गठन कर इसको निजी हाथों में देने की प्रक्रिया आरम्भ की गई है। इस कारण आज नगर निगम का बिल्कुल भी इस कंपनी के मनमाने निर्णयों पर कोई रोक लगाने का अधिकार नहीं रह गया है।माकपा नेता ने कहा कि आज भी शहर के कई इलाकों में 2 से 3 दिनों तक पानी की आपूर्ति नहीं कि जा रही है, लेकिन नगर निगम इस पर कोई भी निर्णय नहीं ले पाता है और कंपनी के समक्ष लाचार नजर आता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम शिमला एक संवैधानिक संस्था होने के बावजूद सरकार के दबाव में आकर सरकार के एक विभाग के रूप में कार्य कर केवल सरकार के आदेशों की ही पालना कर रहा है और वह शिमला शहर की जनता के हितों की रक्षा करने में पूर्णतः विफल हुआ है।
संजय चौहान ने कहा कि शिमला शहर के विधायक जो शहरी विकास मंत्री व नगर निगम शिमला के सहयोगी सदस्य भी हैं, वह भी शहर की जनता के हितों की रक्षा के बजाय सरकार में मंत्री के रूप में कार्य कर नगर निगम को जनविरोधी निर्णय लागू करने के लिए बाध्य कर जनता पर सरकार के जनविरोधी निर्णय थोपने का ही कार्य कर अपना दायित्व निभाने में पूर्णतः विफल रहे हैं। चौहान ने कहा कि सीपीएम सरकार व नगर निगम शिमला से मांग करती है कि 8 माह के इन पानी के भारी भरकम बिलों को तुरंत वापिस ले तथा कोविड-19 महामारी के समय के पानी व अन्य बिलों पर छूट दी जाये। अन्यथा पार्टी शहर में शहरवासियों के समस्त नागरिक, सामाजिक व अन्य जन संगठनों के सहयोग से सरकार व नगर निगम शिमला के द्वारा लागू की जा रही जनता पर आर्थिक बोझ डालने वाली व सेवाओं के निजीकरण की जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध तथा सभी को सस्ती वहन करने योग्य व बेहतर जन सेवाओं को उपलब्ध करवाने के लिए संगठित होकर संघर्ष कर इन नीतियों को बदलने के लिए सरकार व नगर निगम को बाध्य करेंगी।
