कांग्रेस नेताओं के लिए अलग और आम बागवानों के लिए अलग नियम क्यों? सरकार श्वेत पत्र जारी कर बताए पूरी स्थिति
एमआईएस का 100 करोड़ से अधिक बकाया तत्काल चुकाए सरकार, कलेक्शन सेंटर खोलने और पूरी प्रोक्योरमेंट चेन की जांच की मांग
शिमला। भाजपा नेता एवं जुब्बल-कोटखाई से प्रत्याशी चेतन बरागटा ने सेब सीजन के बीच बागवानों की समस्याओं को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बागवानों को राहत देने के बजाय उन्हें अपराधी की तरह नोटिस देकर जांच के कटघरे में खड़ा कर रही है। बरागटा ने मांग की कि एमआईएस के तहत वर्ष 2025 में 100 से अधिक बोरी सेब देने वाले बागवानों को जारी नोटिस तत्काल वापस लिए जाएं और यदि सरकार को किसी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका है तो पूरी प्रोक्योरमेंट चेन की निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
बरागटा ने कहा कि कम उत्पादन, प्रतिकूल मौसम, फंगल अटैक, ओलावृष्टि और बढ़ती लागत के कारण पहले ही बागवान आर्थिक दबाव में हैं। ऐसे समय में सरकार को उनके साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन इसके विपरीत दस्तावेजों के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा है। बरागटा ने कहा कि इसी संबंध में उन्होंने मंगलवार को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर बागवानों की समस्याओं और सरकार की नीतियों से पैदा हो रही परेशानियों से अवगत करवाया है।
आधार से लेकर बैंक स्टेटमेंट तक मांगे जा रहे दस्तावेज
चेतन बरागटा ने कहा कि वर्ष 2025 में एमआईएस के तहत 100 से अधिक बोरियां सेब देने वाले बागवानों को जांच और सत्यापन के नोटिस भेजे जा रहे हैं। इन नोटिस में आधार कार्ड, जमाबंदी, ततीमा, ए और बी ग्रेड सेब की बिक्री से संबंधित आढ़तियों की पर्चियां तथा बैंक स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं और अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होने को कहा जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब एचपीएमसी ने बागवानों से सेब खरीदा था, तब यह सत्यापन क्यों नहीं किया गया। अब भुगतान के समय बागवानों से इतने दस्तावेज क्यों मांगे जा रहे हैं। बरागटा ने कहा कि वर्ष 2025 में करीब 45 हजार बागवानों ने एमआईएस के तहत सेब दिया था और इनमें 7 हजार से अधिक बागवान ऐसे बताए जा रहे हैं, जिन्होंने 100 से अधिक बोरियां दी थीं।
सरकार श्वेत पत्र जारी कर पूरी स्थिति स्पष्ट करे
बरागटा ने आरोप लगाया कि सरकार की कार्रवाई में समानता नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि आम बागवानों को नोटिस दिए जा रहे हैं, जबकि सत्ता के प्रभावशाली लोगों के मामलों में कथित तौर पर अलग रवैया अपनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार श्वेत पत्र जारी कर बताए कि 100 से अधिक बोरी सेब देने वाले कुल कितने बागवान हैं, कितनों को नोटिस जारी किए गए, नोटिस जारी करने का आधार क्या है और कितने लोगों को जांच से बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि यदि नियम बनाया गया है तो वह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
सिर्फ बागवान नहीं, पूरी प्रोक्योरमेंट चेन की जांच हो
बरागटा ने कहा कि यदि सरकार को एमआईएस खरीद में किसी प्रकार की गड़बड़ी का संदेह है तो जांच केवल बागवानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कलेक्शन सेंटरों पर तैनात कर्मचारियों, एचपीएमसी के रिकॉर्ड, परिवहन व्यवस्था और खरीद से लेकर भुगतान तक पूरी प्रोक्योरमेंट चेन की जांच होनी चाहिए। उन्होंने एचपीएमसी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह संस्था भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले अपनी खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाए और पिछले सीजन में बड़ी मात्रा में सेब नष्ट किए जाने के मामले में भी रिकॉर्ड सार्वजनिक करे।
एमआईएस का 100 करोड़ से अधिक बकाया तत्काल जारी हो
भाजपा नेता चेतन बरागटा ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एमआईएस के तहत बागवानों का 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि बागवानों को कागजी औपचारिकताओं में उलझाने के बजाय उनका बकाया तत्काल जारी किया जाए। बरागटा ने कहा कि यह सरकार की ओर से बागवानों पर कोई एहसान नहीं है, बल्कि उनकी उपज का पैसा और उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि भुगतान के लिए बुजुर्ग बागवानों को भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
25 प्रतिशत खरीद सीमा पर भी सरकार से मांगा जवाब
बरागटा ने सेब खरीद की कथित 25 प्रतिशत सीमा को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मौसम की मार, फंगल अटैक और ओलावृष्टि के कारण कई बागवानों की बड़ी मात्रा में फसल एमआईएस श्रेणी में जा सकती है। ऐसे में यदि किसी बागवान की 50, 60 या 80 प्रतिशत फसल खराब गुणवत्ता के कारण एमआईएस श्रेणी में आती है तो वह अपनी उपज कहां बेचेगा।
उन्होंने सवाल किया कि 25 प्रतिशत की सीमा किस वैज्ञानिक और व्यावहारिक आधार पर तय की गई है। सरकार को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
संयुक्त खातों की जमीन को लेकर भी उठाए सवाल
बरागटा ने कहा कि हिमाचल में बड़ी संख्या में बागवानों की जमीन संयुक्त खातों में है। एक ही परिवार में माता-पिता, भाई या अन्य सदस्य संयुक्त हिस्सेदार हो सकते हैं, जबकि एमआईएस की पर्ची किसी एक सदस्य के नाम बनती है। ऐसे में जमीन और उत्पादन का अनुपात किस आधार पर तय किया जाएगा, सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना जमीनी वास्तविकताओं को समझे नई-नई गाइडलाइन जारी करना सरकार और नौकरशाही के बीच संवाद की कमी को दर्शाता है।
सेब सीजन शुरू, कई कलेक्शन सेंटर अभी भी नहीं खुले
बरागटा ने कहा कि सेब सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन कई क्षेत्रों में बागवानों को कलेक्शन सेंटरों को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कोटखाई का उदाहरण देते हुए कहा कि विरोध के बाद कलेक्शन सेंटर बढ़ाने की बात कही गई, लेकिन धरातल पर कई स्थानों पर बागवानों को यह पता नहीं है कि कौन सा सेंटर चालू है और खरीद कहां से शुरू हुई है। उन्होंने मांग की कि सभी अधिसूचित कलेक्शन सेंटर तत्काल खोले जाएं तथा उनकी सूची, स्थान और खरीद शुरू होने की तारीख सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय पर सेंटर नहीं खुले तो सी-ग्रेड सेब खराब होने से बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
सरकार नहीं जागी तो सड़कों पर उतरेंगे : बरागटा
चेतन बरागटा ने कहा कि भाजपा पहले भी ठियोग, कोटखाई, रोहड़ू सहित सेब उत्पादक क्षेत्रों के बागवानों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाती रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से चेताया जा रहा है, लेकिन यदि बागवानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 100 से अधिक बोरी सेब देने वाले बागवानों के नोटिस वापस लेने, चयनात्मक कार्रवाई बंद करने, पूरी प्रोक्योरमेंट चेन की जांच करने, एमआईएस का 100 करोड़ रुपये से अधिक बकाया जारी करने, सभी कलेक्शन सेंटर खोलने, एचपीएमसी और हिमफैड के बीच संतुलन बनाने, सी-ग्रेड सेब की पर्याप्त खरीद सुनिश्चित करने, पीपी सेंटरों में दवाइयां उपलब्ध करवाने और लंबित सब्सिडी जारी करने की दिशा में सरकार तत्काल कदम उठाए।
