शिमला। भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं प्रगतिशील बागवान चेतन सिंह बरागटा ने प्रदेश में सेब बागवानी को प्रभावित कर रही समय से पहले पतझड़ और फंगल रोगों की गंभीर समस्या पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इस संबंध में सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
चेतन बरागटा ने कहा कि पिछले कई वर्षों से हिमाचल प्रदेश के अधिकांश सेब उत्पादक क्षेत्रों में पत्तियों का समय से पहले पीला पड़ना, धब्बे आना और समय से पहले झड़ना लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा प्रभाव पेड़ों की सेहत, अगले वर्ष की फलधारण क्षमता और सेब उत्पादन पर पड़ रहा है। इस वर्ष पहले ही उत्पादन कम रहने की संभावना जताई जा रही है, ऐसे में यह समस्या बागवानों की चिंता को और बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का अधिकांश बागवान उद्यान विभाग और डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन द्वारा जारी स्प्रे शेड्यूल के अनुसार दवाइयों का छिड़काव करता है। इसके बावजूद यदि हर वर्ष यही समस्या दोबारा सामने आ रही है तो यह गंभीर वैज्ञानिक अध्ययन का विषय है।
चेतन बरागटा ने कहा कि अब समय आ गया है कि इस समस्या की वास्तविक वजह का पता लगाया जाए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि यह केवल मार्सोनिना लीफ ब्लॉच है, अल्टरनेरिया है, पोषक तत्वों का असंतुलन है, जलवायु परिवर्तन का प्रभाव है या कोई अन्य कारण है। उन्होंने कहा कि जब तक बीमारी की सही पहचान नहीं होगी, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि नौणी विश्वविद्यालय, उद्यान विभाग तथा राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गठित कर प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। मिट्टी, पत्तियों, जड़ों और मौसम से जुड़े सभी पहलुओं का परीक्षण कर बागवानों को वैज्ञानिक एवं क्षेत्र-विशिष्ट समाधान उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि पीपी सेंटरों के माध्यम से प्रभावी फफूंदनाशक, कीटनाशक तथा अन्य आवश्यक कृषि सामग्री पर्याप्त मात्रा में और रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि बढ़ती लागत से जूझ रहे बागवानों को राहत मिल सके।
चेतन बरागटा ने कहा कि सेब केवल एक फसल नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश के लाखों परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर सेब बागवानी पर निर्भर है। यदि इस समस्या का समय रहते वैज्ञानिक समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले वर्षों में इसका गंभीर आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पूरे प्रदेश को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि बागवानों के भविष्य को सुरक्षित करने का है। प्रदेश सरकार को इस विषय को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ठोस और परिणाममुखी कार्रवाई करनी चाहिए।
