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63 युवा पहुंचेंगे 13 सीमावर्ती गांवों में, सात दिन तक करेंगे‌ जन-जागरूकता और सामुदायिक गतिविधियां 

रिकांगपिओ। सीमावर्ती क्षेत्रों को विकास और जनभागीदारी के नए केंद्रों के रूप में सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए माई भारत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सहयोग से विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-2026 के द्वितीय चरण का शुभारंभ किन्नौर के रिकांगपिओ स्थित आईटीबीपी बेस कैंप से किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास को गति देना, युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना तथा सीमावर्ती समुदायों के साथ सार्थक सहभागिता को बढ़ावा देना है। यह पहल भारत सरकार की उस व्यापक सोच का हिस्सा है जिसके तहत सीमावर्ती गांवों को केवल सुरक्षा की दृष्टि से नहीं, बल्कि विकास, अवसर और आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

इस चरण में देश के विभिन्न राज्यों से आए 63 प्रतिभागियों को 13 सीमावर्ती गांवों में भेजा गया है, जिन्हें 6 क्लस्टरों में विभाजित किया गया है। अगले सात दिनों तक ये युवा किन्नौर और लाहौल-स्पीति के गांवों में रहकर स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर सामाजिक, सांस्कृतिक और जन-जागरूकता आधारित गतिविधियों का संचालन करेंगे।

प्रतिभागियों को आईटीबीपी की 17वीं वाहिनी के उप कमांडेंट वीरेंद्र सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांव देश की पहचान और सुरक्षा दोनों के महत्वपूर्ण आधार हैं तथा युवाओं की भागीदारी इन क्षेत्रों में सामाजिक ऊर्जा और नए विचार लेकर आती है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रीय एकता, सेवा और सामुदायिक नेतृत्व की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। 

गांवों में प्रस्थान से पहले प्रतिभागियों ने रेकांग पियो स्थित आईटीबीपी बेस कैंप में तीन दिवसीय अनुकूलन प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य परीक्षण, शारीरिक तैयारी, सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की जानकारी, उच्च हिमालयी परिस्थितियों में कार्य करने की तैयारी तथा आईटीबीपी अधिकारियों के साथ संवाद सत्र आयोजित किए गए। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी कार्य के लिए तैयार करना था। 

अपने प्रवास के दौरान प्रतिभागी स्वच्छता अभियान, खेल एवं युवा गतिविधियां, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विद्यालयों और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद, सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता तथा सामुदायिक विकास कार्यक्रमों का संचालन करेंगे। इन प्रयासों से युवाओं और सीमांत समुदायों के बीच विश्वास, सहयोग और साझा सीख का वातावरण मजबूत होने की उम्मीद है। 

विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम युवाओं को सीमाओं के जीवन को समझने, स्थानीय संस्कृति से जुड़ने और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। माई भारत और आईटीबीपी का यह संयुक्त प्रयास विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है। 

By admin

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