Spread the love

शिमला। सैहब सोसाइटी की एजीएम में सैहब कर्मियों की दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि समाप्त करने के निर्णय के विरोध में सीटू से संबंधित शिमला की सैहब सोसाइटी यूनियन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर उतर गई है। उपायुक्त शिमला द्वारा एस्मा लागू किए जाने के बावजूद शुक्रवार को हड़ताल पूरी तरह प्रभावी रही और घर-घर से कूड़ा उठाने वाले कर्मियों, सुपरवाइजरों, सड़क सफाई कर्मचारियों तथा ड्राइवरों सहित सभी सैहब कर्मियों ने कामकाज बंद रखा। हड़ताल के चलते शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और कोई भी कर्मचारी कार्य पर नहीं गया।

हड़ताल के दौरान उपायुक्त कार्यालय शिमला के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि बहाल करने तथा अन्य लंबित मांगों को लेकर आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला सचिव बालक राम, विवेक कश्यप, यूनियन अध्यक्ष जसवंत सिंह, महासचिव ओमप्रकाश गर्ग, उपाध्यक्ष अमित भाटिया, रवि कुमार दलित, कर्म चंद भाटिया, सुशील कुमार बौद्ध, विकास थापटा, रोड स्वीपिंग स्टाफ नेता प्रमोद कुमार, सुरेन्द्र गिल लक्की, लक्की मट्टू और राहुल सलोत्रा सहित अन्य नेताओं ने नगर निगम प्रशासन के फैसले की कड़ी आलोचना की।

वक्ताओं ने कहा कि दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि की जगह तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) लागू करने से प्रत्येक मजदूर को भविष्य में हर महीने लगभग 700 से 1000 रुपये तक का नुकसान होगा। उन्होंने इसे मजदूर विरोधी फैसला बताते हुए कहा कि इसके खिलाफ निर्णायक आंदोलन चलाया जाएगा।

इन नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन लगातार जनता पर कूड़ा, पानी और प्रॉपर्टी टैक्स में हर वर्ष दस प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर रहा है, लेकिन इस अतिरिक्त राजस्व का लाभ सफाई कर्मियों को नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सैहब कर्मियों पर काम का बोझ चार गुना तक बढ़ा दिया गया है। पहले जहां एक कर्मचारी को लगभग 80 घरों से कूड़ा उठाना पड़ता था, वहीं अब यह संख्या बढ़ाकर 300 तक कर दी गई है। इसके बावजूद कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने के बजाय उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि समाप्त कर दी गई है।

वक्ताओं ने कहा कि तीन प्रतिशत डीए दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि के अतिरिक्त दिया जाना चाहिए था, लेकिन नगर निगम प्रशासन ने इसे वेतन वृद्धि के विकल्प के रूप में लागू कर कर्मचारियों के साथ अन्याय किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम ने क्यूआर कोड प्रणाली पर लगभग ढाई करोड़ रुपये खर्च कर दिए, जबकि इसी राशि से 150 नए मजदूरों को रोजगार देकर पुराने कर्मचारियों पर कार्यभार कम किया जा सकता था।

यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि बोनस एक्ट 1965 के प्रावधानों के अनुसार कर्मचारियों को नियमानुसार बोनस नहीं दिया जा रहा। उनका आरोप है कि 1500 रुपये बोनस को बढ़ाकर मात्र 2000 रुपये करने की घोषणा कर्मचारियों को गुमराह करने का प्रयास है, जबकि कानून के अनुसार इससे कई गुना अधिक बोनस मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सात वार्षिक छुट्टियों की घोषणा भी कानूनी तौर पर निर्धारित 39 छुट्टियों से बहुत कम है। साथ ही कर्मचारियों की 15 दिन की स्पेशल लीव भी समाप्त कर दी गई है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सैहब कर्मियों को छुट्टियों, ओवरटाइम और अतिरिक्त कार्य का भुगतान नहीं किया जा रहा तथा श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को सैहब कर्मी घोषित करना केवल दिखावा है, क्योंकि उन्हें दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि का आर्थिक लाभ नहीं दिया जा रहा। यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। 

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *