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कहा – यदि केस दर्ज न किया तो होगा आंदोलन 

शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार से कार्यवाहक मुख्य सचिव संजय गुप्ता को तत्काल पद से हटाने और चैस्टर हिल, सोलन के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मुकदमा चलाने की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि संजय गुप्ता ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए प्रदेश के विभिन्न कानूनों का उल्लंघन कर संबंधित कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। 

पार्टी के राज्य सचिव संजय चौहान ने शनिवार को यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इस मामले में भू-माफिया और रियल एस्टेट माफिया की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार से विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की गई है ताकि अवैध रूप से भूमि खरीद में संलिप्त सभी अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।

चौहान ने कहा कि उन्होंने पिछले दिनों प्रेसवार्ता में भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यवाहक मुख्य सचिव ने 6 दिसंबर 2025 को उपायुक्त सोलन को एक कथित रूप से अवैध पत्र लिखकर उन्हें उनके कानूनी दायित्वों के निर्वहन से रोकने का प्रयास किया। जबकि स्थानीय लोगों द्वारा चैस्टर हिल के मालिकों के खिलाफ हिमाचल प्रदेश किरायेदारी और भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के उल्लंघन की शिकायत दी गई थी।

इस शिकायत के आधार पर उपायुक्त सोलन ने जांच उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) को सौंपी थी। जांच में यह सामने आया कि संबंधित कंपनी ने बेनामी संपत्ति के रूप में जमीन खरीदी है और धारा 118 का उल्लंघन किया गया है। एसडीएम की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसके बावजूद, मुख्य सचिव द्वारा हस्तक्षेप कर कार्रवाई को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। 

संजय चौहान ने कहा कि अब सरकार के अतिरिक्त सचिव (राजस्व) ने 6 दिसंबर 2025 के उस पत्र को निरस्त कर दिया है और चैस्टर हिल के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसके तहत बेनामी रूप से खरीदी गई जमीन को सरकार अपने कब्जे में लेगी। उन्होंने कहा कि सीपीआईएम ने नगर निगम सोलन से जुड़े एक अन्य मामले का भी जिक्र किया है। इसमें आरोप है कि चैस्टर हिल द्वारा किए गए अवैध निर्माण को गिराने के लिए नगर निगम कमिश्नर द्वारा हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 253 और 254 के तहत पारित आदेशों पर भी मुख्य सचिव ने गैरकानूनी तरीके से रोक लगाई। इसमें बताया गया कि 1 नवंबर और 6 नवंबर 2025 को एक ही मामले में दो अलग-अलग आदेश पारित किए गए, जबकि इन धाराओं के तहत सुनवाई का अधिकार जिला न्यायाधीश को होता है, न कि मुख्य सचिव को। 

चौहान ने कहा कि इन दोनों मामलों से स्पष्ट होता है कि कार्यवाहक मुख्य सचिव ने अपने पद का दुरुपयोग कर कानून की अवहेलना की और संबंधित कंपनी को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि संजय गुप्ता को तुरंत पद से नहीं हटाया गया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो पार्टी प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी, जो तब तक जारी रहेगा जब तक इस मामले में कार्रवाई नहीं होती।

By admin

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