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जुब्बल। हिमाचल सेब उत्पादक संघ के जुब्बल ब्लॉक का प्रथम सम्मेलन मंगलवार को जुब्बल स्थित हाटकोटी में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। सम्मेलन में जुब्बल क्षेत्र के विभिन्न गांवों से गठित स्थानीय इकाइयों के किसान एवं बागवान प्रतिनिधियों ने भाग लेकर संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया। 

इस सम्मेलन के संचालन के लिए गठित अध्यक्ष मंडल में संजय कुमार, अशोक झौहटा, चन्दर चौहान, बॉबी छाजटा तथा जय सिंह जैहटा शामिल रहे। इसके अतिरिक्त सेब उत्पादक संघ के राज्य कमेटी सदस्य संजय चौहान व रमन थारटा भी उपस्थित रहे। संजय कुमार ने सम्मेलन में पिछले वर्षों की संगठनात्मक गतिविधियों और संघर्षों की विस्तृत रिपोर्ट सभा के समक्ष प्रस्तुत की। 

सम्मेलन में भूमि से बेदखली के मामलों को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि बागवानों को बेदखली के नाम पर परेशान किया जा रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है। निर्णय लिया गया कि जब तक सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार ज़मीन देने के लिए स्पष्ट नीति नहीं बनाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सेब उत्पादकों के अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक एकजुटता और संघर्ष को आवश्यक बताया गया।

बैठक में सरकार की नीतियों के कारण बढ़ते कृषि व बागवानी के बढ़ते संकट पर विस्तृत चर्चा की गई। सरकार कृषि क्षेत्र में दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म कर रही है, जिससे लागत कीमत बढ़ रही है और किसानों व बागवानों को बाज़ार में उनके उत्पाद के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा न्यूजीलैंड और यूरोपियन यूनियन के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) तथा अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते से देश व प्रदेश की सेब की खेती पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि केंद्र सरकार द्वारा इन समझौतों के तहत सेब पर आयात शुल्क करने से विदेशों से सस्ता सेब देश की मंडियों में आने से से स्थानीय उत्पादकों को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा बिजली संशोधन बिल 2025 व स्मार्ट मीटर योजना और मनरेगा को समाप्त करने, बीज विधेयक, मण्डी मध्यस्थता योजना (MIS) के बकाया भुगतान जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इन नीतियों को किसान हितों के विपरीत बताते हुए इनके खिलाफ आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया। यदि आवश्यकता हुई तो केंद्र सरकार की इन किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर दिल्ली कूच भी करेंगे और आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि केंद्र सरकार अपने इन जनविरोधी नीतियों को वापिस नहीं ले लेती। 

सम्मेलन में सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। जय सिंह जैहटा को अध्यक्ष, संजय कुमार को महासचिव तथा चन्दर चौहान को वित सचिव चुना गया। उपाध्यक्ष पद पर अशोक झौहटा, गणेश छाजटा, पन्ना लाल ठाकुर, पवन कुमार, बॉबी छाजटा, लक्ष्मी चौहान और शारदा लुदरेटा का चयन किया गया। सचिव पद के लिए आर्यन नेगी, देवी लाल, नरेश कुमार, प्रेम कालटा, भूपेश चौहान, रविन्द्र लुदरेटा तथा हरीश चन्द्रा को चुना गया। इस अवसर पर 39 सदस्यीय ब्लॉक कमेटी का गठन भी सर्वसम्मति से किया गया।

बैठक में आगामी 27 और 28 फरवरी 2025 को शिमला में आयोजित होने वाले जिला सम्मेलन में भाग लेने के लिए 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की। 

सम्मेलन के अंत में निर्णय लिया गया कि संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने के लिए गांव स्तर पर नई कमेटियों का गठन प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। साथ ही बागवानों की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर संघर्ष को आगे बढ़ाया जाएगा। 

By admin

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