शिमला। नशे के खिलाफ एकजुट हुई प्रदेश के 57 संगठनों का सामूहिक मंच हिमाचल फोरम अगेंस्ट ड्रग एब्यूज (HFADA) ने नशा मुक्ति और ड्रग डी-एडिक्शन के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन बैठक का दीपक सानन की अध्यक्षता में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सेमिनार हॉल में आयोजन किया गया।
बैठक मे मुख्यमंत्री की अगुवाई में प्रदेश सरकार की नशामुक्त हिमाचल अभियान तथा चिट्टा के खिलाफ चलाई मुहीम के प्रति प्राथमिकता की सराहना की।
साथ ही नशे के प्रति युवाओं के बढ़ते झुकाव तथा ओवरडोज से लगातार हो रही मोतों के लिए चिंता भी जताई। जिसके लिए नशे से जुड़े व्यापक पहलुओं को भी इस अभियान का हिस्सा बनाने की वकालत की। इस बारे HFADA द्वारा सरकार को एक ज्ञापन सौंपकर सुझाव दिया जाएगा।

इस कंसलटेशन बैठक में ESOMSA के निदेशक सुमित खिमटा IAS, सेवानिवृत IAS एवं पूर्व निदेशक हंस राज चौहान, मनरेगा के सोशल ऑडिट निदेशक रविंद्र शर्मा, अतिरिक्त निदेशक डॉ भावना, पंचायती राज विभाग की अतिरिक्त निदेशक डॉ नीलम, स्वास्थ्य विभाग के उप निदेशक सहित 7 विभागों के प्रतिनिधियों, करीब दो दर्जन सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक संस्थाओं एवं जन संगठनों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
बैठक में अध्यक्ष दीपक सानन ने HFADA की प्रासंगिकता को रेखांकित किया तथा नशे की बढ़ती समस्या पर सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। सानन ने इससे निपटने के लिए प्रिवेटिव पहलुओं पर समन्वित और प्रभावी रणनीति तैयार करने पर बल दिया।
इस परामर्श बैठक में तकनीकी सहयोगी गुंजन संस्था से कार्यकारी निदेशक विजय कुमार ने प्रिवेशन हस्तक्षेप पर प्रस्तुति के बाद सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार नशा युवाओं, परिवारों और समाज पर गहरा एवं नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
बैठक के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि नशा केवल एक कानूनी समस्या नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर बीमारी और सामाजिक चुनौती है, जिससे निपटने के लिए सरकार, गैर-सरकारी संस्थाओं, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा संस्थानों और समाज के प्रत्येक वर्ग की संयुक्त भागीदारी आवश्यक है। प्रतिभागियों ने जागरूकता अभियानों, काउंसलिंग, पुनर्वास सेवाओं तथा समुदाय आधारित हस्तक्षेपों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके अतिरिक्त बैठक में ड्रग डी-एडिक्शन से जुड़े मौजूदा कार्यक्रमों, सेवाओं और योजनाओं पर भी चर्चा की गई तथा यह सुझाव दिया गया कि जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित कर इन सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाया जाए। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय समुदायों में निरंतरता में संवाद और जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर भी सहमति बनी।
बैठक के अंत में सभी संस्थाओं और विभागों ने नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए आपसी सहयोग, साझा प्रयास और नियमित संवाद को जारी रखने का संकल्प लिया। यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य में ऐसी परामर्श बैठकों के जरिये विभिन्न लक्षित समूहों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाने की जरूरत है।
बैठक में HFADA की ओर से सत्यवान पुंडीर ने सभी की सहमति के साथ नशा मुक्ति अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रिवेंटिव रणनीति पर पांच सूत्रीय ज्ञापन देने का प्रस्ताव पेश किया।
