पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह से पूर्व अपने सम्बोधन में बोले विधान सभा अध्यक्ष पठानिया
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा है कि लोकतत्र में जनता सर्वोच्च है तथा शासन करने की शक्तियां जनता से ही निकलती हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तीनों स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। इनमें विधायिका का स्थान विशेष है, क्योंकि यही संस्था जनता का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व करती है और कानून निर्माण, नीति निर्धारण तथा सरकार पर नियन्त्रण जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती है। इसलिए जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही लोकतंत्र की आत्मा मानी जाती है।
पठानिया बुधवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश विधान सभा के द्वारा विधानसभा मंडप में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने सम्मेलन में चर्चा के लिए चयनित विषय “जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही” पर अपना सम्बोधन दिया। पठानिया ने कहा कि यदि विधायिका जनता की अपेक्षाओं, आवश्यकताओं और हितों के प्रति उत्तरदायी नहीं रहती है तो लोकतंत्र केवल नाम मात्र रह जाता है।
कुलदीप पठानिया ने कहा कि विधायिका वह संस्था है जो कानून बनाने, संशोधित करने और निरस्त करने का कार्य करती है। भारत में विधायिका को संसद और राज्य विधानमण्डलों के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि विधायिका की जवाबदेही का अर्थ है कि विधायिका जनता के हित में कार्य करे, जनता की समस्याओं को समझे, उनके समाधान के लिए कानून बनाए और यदि वह अपने कर्तव्य में असफल रहती है तो जनता उसे चुनाव के माध्यम से बदल सके।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा का जिक्र करते हुए पठानिया ने कहा कि उसकी अपनी एक उच्च परम्परा तथा गरिमा है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वप्रथम निर्वाचित पीठासीन अधिकारी विठ्ठलभाई पटेल का चुनाव उसी भवन में वर्ष 1925 में हुआ था। हालांकि फ्रेडरिक व्हाईट वर्ष 1919 में राष्ट्रीय असैम्बली के पहले नामांकित चेयरमैन बने थे। महिलाओं को मत देने तथा अंग्रेजो भारत छोड़ो का प्रस्ताव भी उसी ऐतिहासिक सदन में हुआ था।
पठानिया ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों का पहला सम्मेलन भी वर्ष 1921 में शिमला में हुआ था। उन्होंने कहा कि आज यहां सदन की बैठकों को बढ़ाने की चर्चा चल रही है और हिमाचल इसमें भी उतम है। हमने वर्ष 1962 में 182 दिनों का सत्र किया था तथा पिछले कैलेण्डर वर्ष में हमने 35 बैठकें पूरी की है जिसकी कार्य उत्पादकता 100 फीसदी से भी उपर रही है। पठानिया ने कहा कि आज विधान मण्डलों में भी आधारभूत संरचना को स्तरोन्नत करने की जरूरत है, लेकिन उसके लिए सरकार के सहयोग की जरूरत रहती है। पठानिया ने कहा कि वह स्वयं उत्तर प्रदेश विधान सभा की आधारभूत संरचना से प्रभावित हुए हैं तथा वह शिमला व धर्मशाला में भी इसी तरह की संरचना करने का प्रयास करेंगे।

ओम बिरला के रात्रि भोज में शामिल हुए विधानसभा अध्यक्ष
इससे पहले, गत रात्रि विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया पीठासीन अधिकारियों के सम्मान में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा आयोजित रात्रि भोज में शामिल हुए। रात्रि भोज में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ भी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस दौरान कुलदीप सिंह पठानिया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के साथ आत्मीय भेंट कर उन्हें टोपी व शॉल पहनाकर सम्मानित किया तथा हिमाचल प्रदेश के पर्यटन बारे भी चर्चा की। इस अवसर पर पठानिया ने लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी हिमाचली अंग वस्त्र पहनाकर सम्मानित किया।
सम्मेलन के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी रहे विशेष अतिथि
86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ बतौर विशेष अतिथि कार्यक्रम में उपस्थित हुए। समापन समारोह के दौरान उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना राज्य सभा उप-सभापति डॉ. हरिवंश, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ तथा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने-अपने सम्बोधन दिए, जबकि उत्तर प्रदेश विधान परिषद अध्यक्ष कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने सभी अतिथियों का सम्मेलन में भाग लेने तथा अपने उत्कृष्ट सम्बोधनों से उत्तर प्रदेश विधान सभा मंडप को सुशोभित एवं पवित्र करने के लिए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर सभी राज्य विधान सभाओं के पीठासीन अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार के काबिना मंत्री, विधायक, संसद सदस्य मौजूद थे।
