न्यूजीलैंड से सेब आयात पर ड्यूटी घटाने का किया विरोध
शिमला। हिमाचल किसान सभा और हिमाचल सेब उत्पादक संघ के आह्वान पर सोमवार को किसानों की मांगों को लेकर शिमला में धरना प्रदर्शन किया। न्यूजीलैंड से सेब आयात पर “इंपोर्ट ड्यूटी” घटाने के विरोध समेत 14 सूत्रीय मांगों को लेकर किसानों ने राज्य सचिवालय का घेराव किया। कैबिनेट बैठक के दौरान हुए इस प्रदर्शन में सैकड़ों किसान और बागवान शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने टालैंड से छोटा शिमला स्थित राज्य सचिवालय तक रैली निकाली तथा केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सचिवालय के बाहर धरना दिया। इस दौरान कुछ समय के लिए चक्का जाम भी किया। नतीजतन काफी समय तक छोटा शिमला में जाम लगा रहा, जिसके चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों ने न्यूज़ीलैंड से सेब आयात पर ड्यूटी घटाने के फैसले को प्रदेश के सेब उत्पादकों के हितों के खिलाफ बताया। किसानों का कहना था कि इससे हिमाचल के सेब उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इसके साथ ही एफआरए को प्रभावी ढंग से लागू करने समेत 14 मांगों को लेकर किसान सचिवालय पहुंचे थे।
सरकारों को नहीं गरीब किसान की परवाह : राकेश सिंघा
इस मौके पर सीपीआई (एम) नेता व पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों सरकारें गरीब किसानों और बागवानों की अनदेखी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। सिंघा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में दूध का समर्थन मूल्य घोषित तो किया गया, लेकिन उसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा। उन्होंने एसजेवीएन को प्रदेश का दूसरा लुटेरा बताते हुए स्मार्ट बिजली मीटर बंद करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि किसान बिजली के बढ़ते बिल चुकाने में असमर्थ है। उन्होंने एमआईएस के तहत मिलने वाले 1500 करोड़ रुपये बंद होने के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों को जिम्मेदार ठहराया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी अनुपालना नहीं कर रही सरकार – संजय चौहान
किसान नेता संजय चौहान ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की खुली अवहेलना का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद किसानों को भूमि देने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई। इसके उलट प्रदेश में जमीन की बेतरतीब बिक्री, सेब के पेड़ों की कटाई और बड़े प्रोजेक्ट्स के नाम पर किसानों को बेदखल किया जा रहा है। पावर प्रोजेक्ट, फोरलेन और नेशनल हाईवे से प्रभावित किसान आज भी मुआवजे के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार आज जल्द नीति बनाने का भरोसा नहीं देती तो आंदोलन उग्र किया जाएगा।
संजय चौहान ने साफ किया कि अगर सरकार ने यदि अब भी आंखें मूंदे रखीं, तो आंदोलन सिर्फ सचिवालय तक सीमित नहीं रहेगा। हिमाचल के गांव-गांव से उठने वाली यह आवाज सत्ता के गलियारों तक गूंजेगी। उन्होंने दुग्ध उत्पादकों को हर महीने पेमेंट का भुगतान को पहली तारीख सुनिश्चित करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि किसान विरोधी मोदी सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना का बजट 2023 में जीरो कर दिया है। वहीं, राज्य सरकार भी बागवानों से खरीदे सेब का भुगतान नहीं कर रही। इस मुद्दे को भी आज रैली के माध्यम से उठाया जा रहा है।
उधर, किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि शिमला के संजय वन में भवन ढहने, भट्टाकुफर में सड़क धंसने और चलौंठी क्षेत्र में मकानों में दरारें आने सहित प्रदेश भर में फोरलेन कंपनियों की मनमानी से कई परिवार बेघर हो चुके हैं, लेकिन न तो निर्माण कंपनियों पर कार्रवाई हो रही है और न ही प्रभावितों को पर्याप्त राहत मिल रही है।
