मांगें पूरी न होने पर निर्णायक संघर्ष की चेतावनी
शिमला। हिमाचल प्रदेश में 108 एवं 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े सैकड़ों कर्मचारी श्रम कानूनों, न्यायिक आदेशों और न्यूनतम वेतन समेत अन्य मांगों को लेकर दो दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल पर चले गए हैं। सीटू के बैनर तले आयोजित यह हड़ताल 48 घंटे तक चलेगी और 27 दिसंबर को शाम आठ बजे समाप्त होगी। हड़ताल के पहले ही दिन प्रदेशभर में एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह बाधित रहीं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हड़ताल के दौरान प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में जोरदार प्रदर्शन किए गए। जिला मुख्यालयों के अलावा राजधानी शिमला में नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक कार्यालय और सोलन जिले के धर्मपुर स्थित मेडस्वान फाउंडेशन के मुख्यालय पर भी सैकड़ों कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर सरकार व प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। शिमला में यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने एनएचएम के प्रबंध निदेशक प्रदीप ठाकुर से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार और महासचिव बालक राम ने कहा कि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन कार्यरत 108 व 102 एंबुलेंस सेवाओं के पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारी भीषण शोषण का शिकार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कर्मचारियों को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारियों से बारह घंटे की ड्यूटी करवाई जाती है, लेकिन ओवरटाइम वेतन का भुगतान नहीं किया जाता।
इन नेताओं ने कहा कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजेएम कोर्ट शिमला और श्रम विभाग के स्पष्ट आदेशों के बावजूद वर्षों से श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन जारी है। उन्होंने कहा कि जब कर्मचारी अपनी यूनियन के माध्यम से आवाज उठाते हैं तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। यूनियन पदाधिकारियों का तबादला कर दिया जाता है या उन्हें दबाव बनाकर त्यागपत्र देने के लिए मजबूर किया जाता है। कई कर्मचारियों को बिना किसी कारण महीनों तक ड्यूटी से बाहर रखा जाता है और डराया-धमकाया जाता है।
यूनियन ने ईपीएफ और ईएसआई के क्रियान्वयन में भी गंभीर गड़बड़ियों का आरोप लगाया। इन नेताओं का कहना है कि ईपीएफ के दोनों हिस्से कर्मचारियों के वेतन से ही काटे जा रहे हैं, जिससे हर कर्मचारी को हर महीने करीब दो हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा कर्मचारियों का बेसिक वेतन भी बेहद कम दर्शाया गया है, जो नियमों के विपरीत है। नियमानुसार छुट्टियां भी नहीं दी जा रहीं।
यूनियन नेताओं ने बताया कि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सरकारी नियमानुसार न्यूनतम वेतन का भुगतान, 12 घंटे की ड्यूटी पर डबल ओवरटाइम वेतन, सभी प्रकार की नियमानुसार छुट्टियां, वाहन की मेंटेनेंस व इंश्योरेंस के दौरान वेतन कटौती बंद करना और पूर्ण वेतन का भुगतान शामिल है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट और श्रम विभाग के आदेशों को तुरंत लागू करने, ईपीएफ-ईएसआई की गड़बड़ियां दूर करने, बेसिक वेतन दुरुस्त करने और जीवीके ईएमआरआई के समय की सेवा निरंतरता व वरिष्ठता का लाभ देने की मांग भी की।
