सोलन। हिमाचल प्रदेश सीटू (सीटू) का 15वां राज्य सम्मेलन सोलन के बजरोल में शुरू हुआ। 28 अक्टूबर तक चलने वाले सम्मेलन का शुभारंभ अखिल भारतीय सीटू के महासचिव एवं पूर्व राज्यसभा सांसद तपन सेन ने किया। इस अवसर पर एटक के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश भारद्वाज ने सम्मेलन को शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर हिमाचल किसान सभा, जनवादी महिला समिति, एसएफआई, डीवाईएफआई और पेंशनर्स एसोसिएशन जैसे भाई संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। किसान सभा के राज्य अध्यक्ष कुलदीप तंवर, एसएफआई के राज्य सचिव सनी, डीवाईएफआई के राज्य सचिव सुरेश सरवाल तथा जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष फालमा चौहान ने सम्मेलन को संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने मजदूर-किसान-महिला-युवा एकता को मज़बूत करने और संयुक्त संघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया।
पूंजीवादी नीतियों पर हमला, श्रम अधिकारों की रक्षा का संकल्प
अपने उद्घाटन भाषण में कॉमरेड तपन सेन ने कहा कि देश की आर्थिक नीतियाँ आज पूरी तरह पूंजीपतियों और बड़े उद्योगपतियों के हित में केंद्रित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को समाप्त करने का प्रयास हैं, जिनसे स्थायी नौकरियाँ खत्म होकर ठेका और फिक्स टर्म रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मिड डे मील वर्कर, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जैसे वर्ग न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं। उद्योगों में श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और सरकार पूंजीपतियों को खुली छूट दे रही है।
कॉमरेड सेन ने कहा कि आने वाले समय में देशभर के मजदूर वर्ग एक व्यापक आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं, जो केंद्र सरकार की जनविरोधी, मजदूर विरोधी और निजीकरण समर्थक नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ा जाएगा। उन्होंने मजदूर-किसान-महिला-युवा आंदोलनों की एकता को समय की आवश्यकता बताया।
सीटू के नेताओं ने रखे संगठन और संघर्ष के मुद्दे
सम्मेलन को सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, राष्ट्रीय सचिव कश्मीर सिंह ठाकुर और राष्ट्रीय नेतृत्व से आए के.एन. उमेश ने भी संबोधित किया। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में राज्यभर से लगभग 300 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में संगठन, आंदोलन और श्रमिक वर्ग की मौजूदा चुनौतियों पर गहन चर्चा की जा रही है। साथ ही आने वाले तीन वर्षों के लिए राज्यव्यापी संघर्ष और संगठन विस्तार की रूपरेखा भी तय की जाएगी।
मजदूर विरोधी लेबर कोड और ठेका प्रथा के खिलाफ संघर्ष जारी
वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड से देश के 70 प्रतिशत उद्योग और 74 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों की सुरक्षा से बाहर हो जाएंगे। इससे मजदूरों के हड़ताल के अधिकार पर भी कठोर प्रतिबंध और दंड का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि काम के घंटे आठ से बढ़ाकर बारह करने का प्रावधान बंधुआ मजदूरी की पुनर्स्थापना जैसा है।
सीटू की प्रमुख मांगें
सीटू की प्रमुख मांगों में मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपए प्रतिमाह तय किया जाए। आंगनबाड़ी, मिड डे मील, आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और ग्रेच्युटी लागू की जाए। ठेका, आउटसोर्स, मल्टीटास्क, टेंपररी, कैजुअल व ट्रेनी कर्मियों को नियमित रोजगार में बदला जाए। मनरेगा मजदूरों के लिए 600 रुपए प्रतिदिन मजदूरी व 200 कार्य दिवस सुनिश्चित किए जाएं। श्रमिक कल्याण बोर्डों से आर्थिक लाभ और पंजीकरण सुविधा बहाल की जाए। ओपीएस बहाली, न्यूनतम पेंशन 9 हजार रुपए और महंगाई पर नियंत्रण के कदम उठाए जाएं। सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण, बीमा क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई, और नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के विरोध में आंदोलन तेज किया जाए।
