शिमला। हिमाचल किसान सभा ने सरकार से ग्रामीण महिलाओं की समस्याओं और उनकी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया है। किसान सभा ने वीरवार को अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस के मौके पर कहा कि कोरोना काल में भले ही ग्रामीण महिलाएं अपना यह अंतरराष्ट्रीय त्योहार न मना पाई हों, लेकिन यह भी सच है कि लॉककडाउन के बाद शहरों से गांव और घरों को लौटे परिवार के सदस्यों की सेवा-व्यवस्था की ज़िम्मेदारी का सबसे अधिक बोझ अगर पड़ा है तो वह ग्रामीण महिलाओं पर ही पड़ा है।
हिमाचल किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तनवर और जिलाध्यक्ष सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि इस दौरान ग्रामीण महिलाओं ने न केवल शारीरिक काम का बोझ सहा है, बल्कि उन्हें मानसिक दबाव, मौखिक और शारीरिक हिंसा का सामना भी करना पड़ा है। वहीं, कोरोना काल में खाद्य संकट से अगर देश किसी हद तक बच पाया तो उसमें ग्रामीण महिलाओं की मेहनत का एक बड़ा हिस्सा शामिल है।डॉ. कुलदीप सिंह तनवर ने कहा कि सरकार और प्रशासन की नज़र में भले ही यह बात छोटी हो, लेकिन गांव की महिला के जीवन में घास और पानी के प्रबंध की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है। हर साल इन्हीं दिनों घास काटते हुए कितनी ही महिलाएं घासनियों और ढांक से गिर कर अपनी जान गंवा देती हैं या आजीवन विकलांगता की शिकार हो जाती हैं। डॉ. तनवर ने कहा कि हिमाचल किसान सभा कई सालों से मांग कर रही है कि पशुपालन को मदद करने के लिए सरकार महिलाओं को घास और चारे की सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए ”पशु-आहार बैंक” तैयार करे, जहां सस्ती दरों पर घास उपलब्ध हो सके और महिलाओं को अपनी जान जोखिम में डालकर घास न काटना पड़े। किसान सभा ने यह भी मांग की कि कृषि, बागवानी या पशुपालन के कार्य करते हुए हादसे का षिकार होने पर उन्हें इलाज के लिए या मृत्यु होने पर उनके परिवार को उचित मुआवज़ा राशि तय की जानी चाहिए।
डॉ. तनवर ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का नारा देने भर से आत्मनिर्भरता नहीं आ सकती इसके लिए ठोस कदम भी उठाने पड़ेंगे। उन्होंने महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा लिए गए लोन पर बैंक ब्याज को 4 प्रतिशत करने की मांग की और समूहों के उत्पादों के बेचने के लिए सही स्थान और लघु व्यापार शुरू करने के लिए सहायता राशि देने की मांग भी की। महात्मा गांधी रोज़गार गारंटी स्कीम के तहत महिलाओं के लिए कार्य प्रगति के मापदण्डों में ढील देने, मनरेगा में दिहाड़ी करने वाली धात्री माताओं के शिशुओं की देखभाल के लिए कार्यस्थल पर उचित व्यवस्था करवाने की भी मांग की।
