Spread the love

शिमला। हिमाचल फोरम अगेंस्ट ड्रग एब्यूज (HFADA) ने नशे की गंभीर समस्या से निपटने के लिए सामूहिक स्तर पर व्यापक रणनीति तैयार करने का ऐलान किया है। 55 सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के समूह ‘हफादा’ से जुड़े संगठनों ने नशे के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ने की तैयारी कर ली है। शनिवार को यहां पत्रकार सम्मेलन में फोरम के अध्यक्ष दीपक सानन ने यह बात कही। 

सामन ने कहा कि 25-26 सितम्बर को आयोजित दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला में 41 सदस्य संस्थाओं ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान नशे के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण बनाते हुए 15 एक्शन प्लान प्रस्तुत किए गए और आगामी तीन एवं छह महीनों के लिए अभियान की कार्यनीति तय की गई। उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग का सहयोग देने के लिए आभार भी जताया।

दीपक सानन ने बताया कि सदस्य संस्थाओं ने अपनी-अपनी क्षमता और ताकत के अनुसार जनता के बीच जाने की योजना बनाई है। जल्द ही विभिन्न स्टेकहोल्डरों—छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, पुलिस और न्यायिक तंत्र—के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे। इसके लिए सदस्य संस्थाओं से प्रतिनिधि लेकर मास्टर ट्रेनर बनाए जाएंगे और इस वर्ष के अंत तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण सामग्री तैयार करने की जिम्मेदारी कांगड़ा स्थित गुंजन संस्था को दी गई है। 

वहीं, संस्था के निदेशक पंकज पंडित ने बताया कि केवल प्रशिक्षण मॉड्यूल ही नहीं, बल्कि संवाद की सामग्री भी तैयार की जाएगी ताकि विभिन्न स्तरों पर प्रभावी हस्तक्षेप संभव हो सके। उन्होंने कहा कि संगठनों के बीच समन्वय और अभियान को जनांदोलन का स्वरूप देने की जिम्मेदारी हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति (HGVS) को सौंपी गई है।

HGVS के राज्य सचिव सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि फोरम में और संस्थाओं के जुड़ने की संभावना है, जिससे अभियान और मजबूत होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे से प्रभावित परिवारों को कोसने या सामाजिक बहिष्कार करने के बजाय उन्हें नैतिक संबल और सहयोग देने की आवश्यकता है। ‘हफादा’ नशा करने वालों की वीडियो बनाने या पिटाई करने जैसी प्रवृत्तियों का विरोध करता है और प्रभावित परिवारों को खुलकर सामने आने तथा उपचार करवाने के लिए प्रेरित करता है।

पुण्डीर ने कहा कि फोरम नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का पक्षधर है, लेकिन नशे को केवल दंडात्मक उपायों से नहीं बल्कि दीर्घकालिक बीमारी के रूप में समझते हुए उपचार, मानसिक सहयोग और पुनर्वास सेवाओं के जरिए ही समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रिलैप्स (relapse) नशामुक्ति प्रक्रिया का स्वाभाविक चरण है और इसे असफलता नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ‘हफादा’ ने नशामुक्त चुनावों के लिए भी पहल करने का संकल्प लिया है। फोरम का उद्देश्य है कि हिमाचल को नशामुक्त बनाने की दिशा में एक संगठित और व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाए।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *