शिमला। युवाओं में तेजी से फैल रही नशे की समस्या से निपटने के लिए हिमाचल फोरम अगेन्स्ट ड्रग एब्यूज (HFADA) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। 25-26 सितम्बर को राज्य कृषि प्रबन्धन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (SAMETI) मशोबरा में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित होगी, जिसमें फोरम से जुड़ी लगभग 50 संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह कार्यशाला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहयोग से आयोजित की जा रही है।
फोरम की समन्वयक संस्था हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य सचिव सत्यवान पुण्डीर ने जानकारी देते हुए कहा कि इस कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञ नशे से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर गहन चर्चा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि फोरम नशा तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का पूर्ण समर्थन करता है, लेकिन नशे को केवल अपराध के दायरे में देखना उचित नहीं है। यह एक दीर्घकालिक बीमारी (chronic disease) है, जिसका स्थायी समाधान केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि समग्र उपचार, मानसिक सहयोग और पुनर्वास सेवाओं के जरिये संभव है।
फोरम की सहमति वाले प्रमुख बिंदु
कार्यशाला में फोरम द्वारा कुछ बिंदुओं पर सहमति बन रही है, जिनमें प्रमुख हैंः
1. नशे की लत युवाओं, परिवारों और समाज के लिए गंभीर चुनौती है। यह केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य का विषय है।
2. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा नशे को मानसिक एवं शारीरिक बीमारी माना गया है, जिसका समाधान औषधीय उपचार के साथ-साथ सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सहयोग से ही संभव है।
3. नशा-पीड़ित व्यक्तियों और उनके परिवारों के प्रति समाज का दृष्टिकोण संवेदनशील और सहयोगात्मक होना चाहिए।
4. नशे की समस्या पर समाज में खुले संवाद को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि लोग इसे छुपाने के बजाय समाधान की दिशा में काम करें।
5. नशा तस्करों, बड़े सप्लायरों और माफियाओं पर NDPS अधिनियम में कठोर संशोधन कर कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी।
6. परामर्श, पुनर्वास, शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाएगा।
7. युवाओं को सकारात्मक विकल्पों और रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित किया जाएगा।
किन बातों का समर्थन नहीं करेगा फोरम
फोरम ने यह भी स्पष्ट किया कि इसके सदस्य या सहयोगी संस्थाएँ किसी भी स्थिति में निम्नलिखित कार्यों का समर्थन नहीं करेंगीः
नशा-पीड़ित व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार, उनकी सरकारी सुविधाएँ समाप्त करना,
मृत्युदंड अथवा एनकाउंटर जैसी सजाओं की मांग,
उनके घरों को ध्वस्त करना या बुलडोजर चलाना,
उनकी सार्वजनिक पिटाई या वीडियो का सोशल मीडिया पर प्रचार।
भविष्य की दिशा
सत्यवान पुण्डीर ने बताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से फोरम का यह एक नायाब प्रयास है, जो आने वाले समय में समाज में नशे से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्यापक अभियान शुरू करेगा और सरकार के नशे के खिलाफ किए जा रहे प्रयासों को और मजबूती देगा।
