धर्मशाला। केंद्रीय विश्वविद्यालय (CU) धर्मशाला की पर्यटन सोसायटी के तत्वावधान में विश्व पर्यटन दिवस 2025 के अवसर पर चल रहे सप्ताहभर के कार्यक्रमों के तीसरे दिन बुधवार को धलू ग्राम पंचायत में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित महत्वपूर्ण गतिविधियों का आयोजन किया गया। यह आयोजन धौलाधार परिसर के पर्यटन, यात्रा एवं आतिथ्य प्रबंधन विद्यालय के छात्रों, शोधार्थियों, संकाय सदस्यों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी के साथ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। ग्राम पंचायत धलू की प्रधान आशा देवी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ पंचायत के वरिष्ठ नागरिक, महिला मंडल की सदस्याएँ, पंचायत प्रतिनिधि, और बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी शामिल हुए। वृक्षारोपण अभियान “एक पेड़ माँ के नाम”, दिनभर की गतिविधियों का पहला चरण था। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “एक पेड़ माँ के नाम” पहल की भावना से प्रेरित था।
कुलपति प्रो. बंसल ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा, “प्रकृति हमारे अस्तित्व का आधार है, और वृक्ष न केवल जीवनदायी हैं बल्कि वे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी पवित्र माने जाते हैं। पर्यटन और सतत रूपांतरण तभी संभव है जब हम पर्यावरण के साथ संतुलित संबंध बनाए रखें।” उन्होंने पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया।
ग्राम पंचायत प्रधान आशा देवी ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय और पंचायत के बीच सहयोग की सराहना की और कहा, “आज यह अभियान केवल वृक्ष लगाने का प्रयास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित भविष्य का वचन है।” दिनभर चलने वाले इस अभियान में विश्व विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और संकाय ने ग्रामवासियों के साथ मिलकर पौधे लगाए। इसमें फलदार, छायादार और स्थानीय प्रजातियों के पौधे शामिल थे। छात्रों ने यह संकल्प भी लिया कि इन पौधों की देखभाल वे निरंतर करेंगे और समय-समय पर धलू ग्राम का दौरा कर उनकी स्थिति का आकलन करेंगे।
कुलपति प्रो. बंसल ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय की सामाजिक ज़िम्मेदारी को रेखांकित करते हुए घोषणा की कि धलू सहित विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए 15 गाँवों में अपस्किलिंग कार्यक्रम, मोबाइल हेल्थ वैन और मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 केवल शैक्षणिक सुधार का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि सामाजिक और सामुदायिक सशक्तिकरण का भी मार्गदर्शक है। केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश इस नीति को अक्षरशः और भावना सहित लागू कर रहा है।” इस घोषणा का गाँव के निवासियों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि यह कदम न केवल शिक्षा, बल्कि स्वास्थ्य और रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी ग्रामवासियों को नई दिशा देगा।
अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र का शैक्षणिक भ्रमण, दिन का दूसरा प्रमुख आकर्षण रहा छात्रों का अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (Waste Management Site) का शैक्षणिक भ्रमण। यहाँ छात्रों ने प्रत्यक्ष रूप से जाना कि अपशिष्ट संग्रह, पृथक्करण और पुनर्चक्रण कैसे किया जाता है। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने छात्रों को समझाया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और रिसाइक्लिंग से न केवल पर्यावरण संरक्षण संभव है, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए आर्थिक अवसर भी उत्पन्न किए जा सकते हैं। इस गतिविधि ने छात्रों को पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने और स्थायी समाधान विकसित करने का अवसर प्रदान किया। यह अनुभव छात्रों के लिए एक व्यावहारिक कक्षा साबित हुआ, जिसने उन्हें जिम्मेदार नागरिक और भावी पर्यटन पेशेवर बनने की दिशा में प्रेरित किया।
विश्व पर्यटन दिवस 2025 समारोह का तीसरा दिन सामुदायिक सहभागिता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सतत विकास के मूल्यों को मूर्त रूप देने वाला रहा। वृक्षारोपण अभियान और अपशिष्ट प्रबंधन अध्ययन ने छात्रों और ग्रामवासियों दोनों को यह अहसास कराया कि सतत भविष्य के लिए छोटे-छोटे कदम भी कितना बड़ा बदलाव ला सकते हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय ने यह वचन दोहराया कि वह भविष्य में भी ऐसे प्रयास जारी रखेगा, जिससे न केवल अकादमिक उत्कृष्टता प्राप्त हो, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी पूरी की जा सके।
