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पूछा – कहीं यह वायरस उन पौधों के माध्यम से तो नहीं आ रहे जो विदेशों से लाए जा रहे 

नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को बेहतर संसाधन और प्रोत्साहन दिया जाए 

शिमला। प्रदेश की सेब बागवानी पर खतरा बनी पत्तों की बीमारी को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता चेतन बरागटा ने कई‌ सवाल उठाए हैं। उन्होंने सेब बागीचों में लगातार वायरस आने पर शंका जाहिर की कि कहीं यह वायरस उन पौधों के माध्यम से तो नहीं आ रहे जो विदेशों से लाए जा रहे हैं। पहले भी उन्होंने मांग की थी कि विदेशों से आने वाले पौधों को कम से कम एक से डेढ़ साल तक क्वारंटीन किया जाए।

 चेतन बरागटा ने कहा कि नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इन दिनों फील्ड में जाकर बागवानों से संवाद कर रहे हैं और पत्तों के सैंपल इकट्ठा कर जांच कर रहे हैं, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह बीमारी वास्तव में अल्टरनेरिया है या कोई और नया, अधिक खतरनाक वायरस। उन्होंने कहा कि यह बीमारी पिछले दो वर्षों से सेब बागानों को भारी नुकसान पहुंचा रही है। जब तक बीमारी का सही कारण नहीं पता चलेगा, तब तक उसका समाधान कैसे होगा?

बरागटा ने सवाल उठाया कि पिछले 15 वर्षों से बागवानी विभाग का जो स्प्रे शेड्यूल है, बागवान उसी के अनुसार स्प्रे कर रहे हैं, फिर भी बीमारी खत्म नहीं हो रही। क्या अब इस शेड्यूल में बदलाव और इनोवेशन की जरूरत नहीं है? क्योंकि अब सेब बागीचों में नए वायरस तेजी से फैल रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह वायरस उन पौधों के माध्यम से तो नहीं आ रहे जो विदेशों से लाए जा रहे हैं। पहले भी उन्होंने मांग की थी कि विदेशों से आने वाले पौधों को कम से कम एक से डेढ़ साल तक क्वारंटीन किया जाए।

बरागटा ने सरकार से सवाल किया कि क्या इस नियम को सही तरीके से लागू किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि बागवानी क्षेत्र हिमाचल की 5,000 करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था है और इसे इस तरह खत्म होते नहीं देखा जा सकता। बरागटा ने कहा कि रिसर्च और डेवलपमेंट के बिना बागवानी आगे नहीं बढ़ सकती। नौणी विश्वविद्यालय को हर साल 160 करोड़ रुपये आरएंडडी के लिए मिलते हैं, जिसमें से 90 फीसदी बागवानी पर खर्च होता है। उन्होंने पूछा कि क्या विश्वविद्यालय नए वायरसों पर शोध कर रहा है? क्या उनके पास इससे जुड़ा नॉलेज बैंक है? क्या वे अन्य संस्थानों के साथ संवाद और तकनीकी आदान-प्रदान कर रहे हैं?

बरागटा ने सरकार से पूछा कि नौणी विश्वविद्यालय जल्द से जल्द यह स्पष्ट करे कि यह बीमारी अल्टरनेरिया है या कोई और नया वायरस। वहीं यह भी कहा कि विदेशों से आ रहे पौधों को क्वारंटीन करने की प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जाए। विश्वविद्यालय के आरएंडडी बजट को बढ़ाया जाए और वैज्ञानिकों को बेहतर संसाधन और प्रोत्साहन दिया जाए।

बरागटा ने कहा कि सरकार को वैज्ञानिकों और बागवानों के बीच समन्वय बनाकर काम करना होगा और समयबद्ध तरीके से जवाबदेही तय करनी होगी, ताकि हिमाचल का बागवानी क्षेत्र सुरक्षित और समृद्ध रह सके। 

By admin

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