शिमला। सीटू से संबंधित मनरेगा और निर्माण मजदूर यूनियन ने सोमवार को शिमला के परिमहल स्वास्थ्य परिसर में प्रदर्शन प्रदर्शन किया। इस दौरान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने
राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव कंवर और सचिव राजीव कुमार का घेराव किया। प्रदर्शन का नेतृत्व सीटू राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मैहरा, महासचिव प्रेम गौतम, उपाध्यक्ष जगत राम, निर्माण फेडरेशन के राज्य अध्यक्ष जोगिंदर कुमार और महासचिव भूपेंद्र सिंह ने किया।

प्रदर्शन में सैकड़ों मजदूर शामिल हुए। यूनियन ने बोर्ड की 47वीं बैठक के दौरान बोर्ड पदाधिकारियों को घेरते हुए मांगपत्र सौंपा और मांगें पूरी करने के लिए एक महीने का अल्टीमेटम दिया। यूनियन पदाधिकारियों का आरोप है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के समय में बोर्ड द्वारा मजदूरों के कल्याण की उपेक्षा की जा रही है।
यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष जोगिंद्र कुमार और महासचिव भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले चार सालों से एक लाख से अधिक मजदूरों की 500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता रोकी गई है। उन्होंने कहा कि यह सहायता गैर-कानूनी तरीके से रोककर अधिकारियों के यात्रा भत्तों और अन्य खर्चों पर धन खर्च किया गया।
अक्टूबर 2024 में आयोजित 46वीं बैठक में लंबित लाभों को 31 दिसंबर तक जारी करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान बैठक में इसे एजेंडे से हटा दिया गया, जिससे मजदूरों में असंतोष बढ़ गया।
ईकेवाईसी और पंजीकरण का मुद्दा
यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि मजदूरों की ईकेवाईसी प्रक्रिया में अनावश्यक बदलाव किए गए। पहले यह लोकमित्र केंद्रों के माध्यम से हो रही थी, लेकिन अब इसे बोर्ड कर्मचारियों द्वारा ऐप के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे देरी हो रही है। इसके अलावा, पंचायतों में काम करने वाले मजदूरों का पंजीकरण नवीनीकरण न होने से 70 फीसदी मजदूरों के कार्ड रद्द हो गए हैं। यूनियन ने मांग की कि बोर्ड का स्थायी सचिव और मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया जाए और राज्य, जिला एवं उप कार्यालयों में रिक्त पद जल्द भरे जाएं।
बोर्ड अध्यक्ष ने यूनियन को एक महीने में सभी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया। यूनियन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो बोर्ड कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
