शिमला। अंतर्विषयक अध्ययन विभाग के छात्रों ने मंगलवार को राष्ट्रीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. रणधीर सिंह रांटा थे और वक्ता के रूप में डॉ. बलदेव सिंह नेगी ने सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर विभाग के दोनों सेमेस्टर के छात्रों के साथ-साथ अन्य शिक्षकों ने भी भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरूआत तृतीय सेमेस्टर के छात्र कमल किशोर द्वारा सभी प्रतिभागियों का स्वागत करने और दिवस के इतिहास को प्रस्तुत करने से हुई। कमल ने बताया कि 2018 से यह दिवस अखिल भारतीय पीपुल्स साइंस नेटवर्क और महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति द्वारा डॉ. नरेंद्र दाभोलकर के योगदान और बलिदान की स्मृति में राष्ट्रीय वैज्ञानिक दिवस के रूप में 20 अक्टूबर को मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि डॉ. दाभोलकर की 2013 में अतिवादियों द्वारा हत्या कर दी गई थी, क्योंकि वे अंधविश्वास विरोधी विचारों के प्रबल समर्थक थे। कमल ने डॉ. दाभोलकर के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (MANS) की स्थापना 1989 में डॉ. दाभोलकर द्वारा की गई थी, जो अंधविश्वास और कुरीतियों के खिलाफ एक सशक्त आंदोलन बन गया। अंधश्रद्धा विरोधी कानून के लिए उनका संघर्ष महत्वपूर्ण था। उन्होंने महाराष्ट्र में अंधविश्वास, काले जादू, और धोखाधड़ी के खिलाफ एक कड़ा कानून बनाने के लिए निरंतर अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप 2013 में महाराष्ट्र में “अंधश्रद्धा निर्मूलन अधिनियम” (Maharashtra Anti-Superstition and Black Magic Act) पारित हुआ। कमल ने कहा कि उनकी विरासत आज भी भारत में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशीलता के लिए आंदोलनों को प्रेरित करती है और युवाओं को अंधविश्वास के खिलाफ जागरूक होने की आवश्यकता पर बल देती है।
डॉ. नेगी ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 51A(h) के तहत मौलिक कर्तव्यों में से एक है। अनुच्छेद 51A(h) भारतीय संविधान के भाग IV-A में शामिल एक मौलिक कर्तव्य है। इसका उद्देश्य प्रत्येक भारतीय नागरिक को तर्कसंगत सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवतावाद की भावना को अपनाने के लिए प्रेरित करना है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण का तात्पर्य है कि नागरिकों को तर्कसंगत सोच, सत्यापन योग्य तथ्यों पर आधारित निर्णय लेने, और अंधविश्वास से बचने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। यह मानवता के प्रति संवेदनशीलता और समानता की भावना को बढ़ावा देने का संकेत है। अनुच्छेद 51A(h) का मुख्य उद्देश्य समाज में तर्कसंगतता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है, ताकि लोगों को अंधविश्वास और अज्ञानता से मुक्त किया जा सके और समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की धारा 11.8 में भी इस दिशा में प्रावधान हैं। उन्होंने यह भी दर्शाया कि भारत के विभिन्न हिस्सों में असंवैधानिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विरोधी गतिविधियों में किस प्रकार से वृद्धि हो रही है। उन्होंने बताया कि जादू-टोना, सांप्रदायिकता, अंधविश्वासी प्रथाएं, और तर्कशीलता या तार्किक शिक्षा पर हमलों जैसी गतिविधियाँ भारत में बढ़ रही हैं। उन्होंने अंत में देश के युवाओं से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का पालन करें और इसके प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करें, ताकि संविधान में निहित कर्तव्यों का पालन किया जा सके।
सभी छात्रों ने चर्चा में भाग लिया और अपने सवाल पूछे। इस सेमिनार को सफल बनाने में तृतीय सेमेस्टर के एमबीए-ग्रामीण विकास के छात्र हनीश कथला, सूरज, दिव्या, मुकुल और पीयूष ने कड़ी मेहनत की। अंत में दीया ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और मुख्य अतिथि एवं वक्ता सहित सभी दर्शकों का आभार व्यक्त किया।
