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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बरसात के दौरान आई आपदा तथा पर्यावरण के नुकसान सहित पर्यावरण से जुड़े विषयों को लेकर विकासार्थ विद्यार्थी संस्था ने सोमवार को शिमला में आपदा की गतिशीलता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी में पर्यावरण विशेषज्ञ, प्राध्यापक, सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित विद्यार्थियों ने भाग लिया।

विकासार्थ विद्यार्थी हिमाचल प्रदेश के प्रमुख प्रो. नितिन ब्यास व प्रदेश संयोजिका शिल्पा कुमारी ने बताया कि आपदा की गतिशीलता पर‌ आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. हीरालाल मुरालीधर सूर्यवंशी,‌ विशिष्ट अतिथि  अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान, कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. देवदत शर्मा, विकासार्थ विद्यार्थी के राष्ट्रीय संयोजक राहुल गौड़, विकासार्थ विद्यार्थी के प्रदेश प्रमुख प्रो. नितिन ब्यास, प्रदेश संयोजिका शिल्पा कुमारी उपस्थित रहीं।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जब आपदा के समय सहायता की जरूरत थी तब भी एसएफडी और सुनील उपाध्याय ट्रस्ट सामूहिक रूप से सेवा सहायता में जुटे हुए थे। आज जब हालत थोड़े सामान्य हैं तो सामूहिक रूप से आपदा के समाधान और हिमाचल में विकास के संतुलित मॉडल के लिए विचार करते हुए जनभागीदारी के माध्यम से अभियान और कार्य योजना तय करने की आवश्यकता है, जिसका सही समय पर विकासार्थ विद्यार्थी ने शुरुआत किया है। हिमाचल प्रदेश के सभी संस्था, संगठन, समूह और जन सामान्य से इस अभियान में साथ आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि छोटे समय का लाभ दूरगामी गंभीर नुकसान देता है। हम लोगों को आपदाओं के साथ जीवन का अनुशासन जो हमारे पूर्वजों ने दिया है उसको वापस से स्मरण करने की जरूरत है।

विकासार्थ विद्यार्थी के राष्ट्रीय संयोजक राहुल गौड़ ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में विकास का अपना पारंपरिक तरीका रहा है। देवभूमि की अपनी परंपराओं को स्मरण करते हुए उनके आधार पर प्रकृति के साथ प्रगति का विचार करना होगा। विकासार्थ विद्यार्थी विद्यार्थी समुदाय में इस विषय की संवेदना जगाने के साथ ही तकनीकी समझ विकसित करते हुए जन भागीदारी के अभियान चलाएगी। समाज के साथ बार बार संवाद स्थापित करना ही समाधान का मार्ग हो सकता है। 

एनआईटी हमीरपुर के निदेशक प्रो. हीरालाल मुरालीधर सूर्यवंशी ने कहा कि सहभागिता से ही समाधान संभव है। अधिक रिसर्च, आंकड़े इकठ्ठा करते हुए लोगों के बीच जाने की आवश्यकता है।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में दो तकनीकी सत्र रहे, जिसमें ‘हिमाचल प्रदेश में हालिया आपदा का मूल्यांकन तथा भविष्य की राहें’ व ‘ढांचागत विकास व प्रभाव मूल्यांकन’ जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इन दोनों चर्चा सत्रों में हिमाचल के प्रमुख शिक्षण संस्था – एचपीयू, आईआईटी मॉडी और एनआईटी हमीरपुर जैसे संस्थाओं से विद्यार्थियों ने  सहभाग लिया। इन चर्चा सत्रों में वक्ता के रूप में आईआईटी रूढ़की से डॉ. अनिंद्या पाइन, डॉ. महेश शर्मा, डॉ. सीमा, चंद्रप्रकाश परसीरा जैसे प्रमुख वक्ता उपस्थित थे।  संगोष्ठी में विषय से संबंधित प्रमुख लोग रहे। सेमिनार के बाद निकले सार को पॉलिसी के रूप में प्रदेश सरकार को सौंपा जाएगा। 

इस एक दिवसीय सेमिनार में हिमाचल प्रदेश में काम कर रहे एनजीओ, संगठन, संस्थाओं के प्रमुखों ने भी सक्रिय हिस्सेदारी की। समापन सत्र में एबीवीपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नागेश ठाकुर, प्रो, राजेश्वर चंदेल प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

By admin

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