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शिमला। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, हिमाचल प्रदेश के तत्वावधान में गठित राज्य स्तरीय योजना स्वीकृति समिति की गत दिन यहां बैठक हुई। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के दिशानिर्देशानुसार बैठक में प्रदेश में बाढ़ से पेयजल योजनाओं को हुए नुकसान और इसकी बहाली को लेकर चर्चा हुई। इसमें जल जीवन मिशन के तहत बनी स्कीमों की मुरम्मत और पुनर्बहाली के लिए 150 करोड़ रुपये के फ्लैक्सी फंड की मांग की गई। इस फण्ड का उपयोग जल जीवन मिशन के तहत विशेषतौर पर आपदा के समय हुए नुकसान से निपटने के लिए किया गया है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में भीषण आपदा से जल जीवन के अर्न्तगत बनी 559 स्कीमों को 512 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने केन्द्र से आग्रह किया कि स्थिति के मद्देनज़र पेयजल स्कीमों की बहाली और मुरम्मत के लिए यथाशीघ्र स्कीमों को स्वीकृति प्रदान करे ताकि पेयजल आपूर्ति सुचारू की जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भूमिगत जलस्तर घटने के कारण उसके पुनर्भरण और जलस्तर को बढ़ाने के लिए प्रदेश की ओर से 452.60 करोड़ रुपए की 45 योजनाएं स्वीकृति के लिए केंद्र को भेजी गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इन स्कीमों से कुल 976 अन्य योजनाओं को भी लाभ होगा और भूमिगत जलस्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि विभाग ने प्रदेश के बर्फीले क्षेत्रों में 12 महीने पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए आधुनिक तकनीक की मदद से एंटी फ्रीज योजनाएं तैयार की जाएगी जो शून्य से नीचे तापमान गिरने पर भी पेयजल की सप्लाई सुनिश्चित हो पाएगी। इसके लिए कमेटी की ओर से 34.2 करोड़ रुपये की 4 पायलट स्कीमें बनाने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया है। इन योजनाओं की सफलता के बाद इस परियोजना को अन्य क्षेत्रों में भी इसका विस्तार किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता सचिव जल शक्ति विभाग अमिताभ अवस्थी ने की। इस बैठक में जल शक्ति विभाग के प्रमुख अभियंता ई. संजीव कौल सहित, मुख्य अभियंता (योजना), मुख्य अभियंता एवं निदेशक राज्य पेयजल स्वच्छता मिशन, हिमाचल प्रदेश, जल शक्ति विभाग के अन्य अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए। विशेषतौर पर भारत सरकार के प्रतिनिधि व अन्य विभागों के अधिकारियों ने बैठक में ऑनलाइन भाग लिया।

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