पालमपुर। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शान्ता कुमार ने कहा है कि 2024 के लोकसभा के चुनाव की दृष्टि से पिछले दिनों बंगलुरु और दिल्ली की बैठकों की बहुत चर्चा हुई। सच्चाई यह है कि बंगलुरु में 26 राजनैतिक दलों के 30 नेता थे, तय कुछ भी नही हुआ, न संयोजक न नेता। केवल अगली बैठक की तरीख तय कर सके। परन्तु दिल्ली में 38 राजनैतिक दल मिले, नेता एक था, सब कुछ तय हो गया।
शांता कुमार ने कहा कि भारत के राजनैतिक इतिहास में केवल एक बार अटल बिहारी वाजपेयी ने 22 दलों को मिलाकर एन.डी.ए. बनाया। न्यूनतम कार्यक्रम स्वीकार किया। चुनाव लड़ा, चुनाव जीता और पांच साल तक शानदार सरकार चला कर दिखाई। ऐसा न पहले कभी हुआ था न भविष्य में होने की आशा है। आज देश की राजनीति में कहीं कोई अटल नहीं दिखाई देता। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति की वास्तविक सच्चाई यह है कि भाजपा और विशेषकर नरेन्द्र मोदी का दूर-दूर तक कोई भी विकल्प नहीं है। विश्वभर में नरेन्द्र मोदी के कारण भारत को एक नई पहचान मिली है, एक नया सम्मान मिला है।
शांता कुमार ने कहा कि चुनाव का असली गणित यह है कि पार्टी के प्रतिबद्ध मतदाता सरकार नहीं बनाते। पार्टियों के प्रतिबद्ध मतदाता हर हाल में अपनी अपनी पार्टी को ही वोट देते हैं, परन्तु लगभग 20 प्रतिशत पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी जिनका किसी पार्टी से कोई सम्बंध नहीं होता, वे मतदाता अन्तिम समय पर जिस पार्टी को वोट देते है उसी से उस पार्टी की सरकार बनती है। उन्होंने कहा जरा सोचें, चुनाव के अन्तिम चरण में भारत का समझदार पढ़ा लिखा बुद्धिजीवी, जिसका किसी पार्टी से कोई सम्बंध नहीं है वह जब वोट डालने जाएगा तो नरेन्द्र मोदी के मुकाबले किसी राहुल या लालू की तरफ देखेगा भी नहीं। उन्हीं वोटों की अधिकता से एक बार फिर से भाजपा की सरकार बनेगी और तीसरी बार नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।
