शिमला। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्य संसदीय सचिवों (CPS) की नियुक्ति को लेकरसुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा सीपीएस की नियुक्ति पर कानूनी राय ले रही है। कानूनविदों की राय के बाद भाजपा इसे अदालत में चुनौती दे सकती है।
जयराम ठाकुर ने शिमला में सोमवार को मीडिया से बातचीत में सीपीएस की नियुक्ति पर सरकार को घेरा। उन्होंने हुए कहा कि मुख्यमंत्री सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन की बात लगातार कर रहे हैं। लेकिन यह कैसा व्यवस्था परिवर्तन, जहां खर्च घटाने की जगह सरकारी खजाने पर खर्च का बोझ बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने विधायकों के विरोध को रोकने के लिए ऐसा कदम उठाया है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि असम में सीपीएस की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट से रद्द हो चुकी है। मणिपुर में भी सीपीएस की नियुक्तियों को अदालती आदेशों के बाद सरकारों ने रद्द कर दिया। वहीं, दिल्ली में कोर्ट के आदेश आने से पहले सीपीएस हटा दिए गए थे। उन्होंने कहा कि भाजपा की पूर्व सरकार ने प्रदेश में सीपीएस की नियुक्ति नहीं की। ।जयराम ठाकुर ने कहा कि असम में सीपीएस की नियुक्ति रद्द करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के कहा था कि यह संविधान के अनुच्छेद 164 (1) (ए) की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने तंज कसा कि हिमाचल में प्रदेश हित में काम करने के बजाय सरकार टिकाने पर अधिक फोकस है।
मंत्रिमंडल असंतुलित, जातीय व क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान नहीं रखा
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश मंत्रिमंडल में जातीय व क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान नहीं रखा गया। कांगड़ा जिला से सरकार बनी है। मगर वहां से एक ही मंत्री बनाया गया। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से एक मंत्री व विधानसभा अध्यक्ष है। जातीय संतुलन का भी सरकार ने ख्याल नहीं रखा है। उन्होंने कहा कि डीजल पर वैट बढ़ाकर सरकार ने आम जनता पर महंगाई का बोझ डाला है।