पालमपुर। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने कहा है भारत में “वन नेशन-वन इलेक्शन” की पॉलिसी लागू होनी चाहिए। उनका कहना है कि भारत में इस समय बड़े-छोटे मिलाकर 34 राज्य हैं। मौजूदा हालात में इनमें से किसी न किसी राज्य में कोई न कोई चुनाव चलता ही रहता है। इसकी वजह से राजनीतिक पार्टियां और उसके नेता इन चुनाव में व्यस्त रहते हैं। इसका नुकसान लोगों को उठाना पड़ता है क्योंकि उनके काम ही नहीं हो पाते।
शांता कुमार ने कहा कि आजकल 5 वर्षों में हर सरकार और पार्टी चुनावों में ही व्यस्त रहती है, जिससे इन चुनाव पर लगभग अरबों रुपए का खर्च होता हैं। ऐसे में सरकारों को देश की बुनियादी समस्याओं पर सोचने और उन्हें हल करने के लिए समय ही नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय की ही बात करें तो हिमाचल में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो चुका है और अगले दो हफ्तों में गुजरात में मतदान होना है। ऐसे में सारे देश के बड़े नेता और सरकारें गुजरात में लगी हैं। दोनों राज्यों के चुनाव पर तकरीबन 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अगले साल यानि 2023 में भी कई राज्यों में चुनाव हैं। उसके बाद 2024 में लोकसभा चुनाव के अलावा 7 राज्यों में भी चुनाव होने हैं। ऐसे में हिमाचल और गुजरात से फ्री होते ही देश के बड़े नेता इन चुनाव में व्यस्त हो जाएंगे।
लोकतंत्र केवल चुनाव तंत्र बना
शांता कुमार ने कहा कि भारत में लोकतंत्र केवल चुनाव तंत्र बनकर रह गया है। उन्होंने कहा दूसरे देशों मे ऐसा नहीं होता है। 1967 तक सभी चुनाव एक साथ होते थे, लेकिन उसके बाद दल बदल से सभी कुछ बदल गया। उन्होंने कहा कि भारत में कुछ समस्या दिन प्रति दिन बढ़ रही है। गरीबी और बेरोजगारी से लोग परेशान हैं। रिपोर्ट के अनुसार 15 करोड़ लोग रात को भूखे सो रहे हैं। नौजवानों के पास काम नहीं है इसलिए वह आत्महत्या कर रहे हैं।
सीट खाली हो तो उपचुनाव की जगह दूसरे नंबर पर रहे नेता को तरजीह दी जाए
शांता कुमार ने कहा कि कानून बदलकर सभी चुनाव 5 साल में एक बार कराने का नियम बनाने की जरूरत है। यदि बीच में किसी वजह से कोई सीट खाली हो जाए तो वहां उपचुनाव न करवाकर दूसरे नंबर पर रहने वाले व्यक्ति को आगे कर देना चाहिए। इससे न समय खराब होगा और न ही पैसा। भ्रष्टाचार भी कम होगा और लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी।
