शिमला। शिमला नागरिक सभा राजधानीशिमला में नगर निगम शिमला व सरकार की लचर कार्यप्रणाली व पेयजल व्यवस्था के कुप्रबंधन के कारण पैदा हुए गंभीर पेयजल संकट व पानी के भारी भरकम बिलों पर गहरी चिंता जताई है। सभा मे मांग की कि शिमला शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त कर शहर के सभी क्षेत्रों में हर रोज नियमित पेयजल की आपूर्ति की जाए। साथ ही मांग की कि जिस तरह से सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के बिल माफ़ करने की घोषणा की है, उसी प्रकार शिमला शहर व अन्य शहरी क्षेत्रों में भी पानी के बिल माफ़ कर जनता को पानी के भारी भरकम बिलों से राहत प्रदान की जाए।
शिमला नागरिक सभा के संयोजक संजय चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार का इस प्रकार का ग्रामीण व शहरी जनता के बीच भेदभावपूर्ण रवैया असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि शिमला नागरिक सभा नगर निगम शिमला व सरकार की पेयजल जैसी आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति में विफलता व सरकार का जनता से इस प्रकार के भेदभावपूर्ण रवैये के विरुद्ध 4 मई को शिमला में उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा व रैली निकाली जाएगी। उन्होंने कहा कि जबसे नगर निगम शिमला व सरकार में बीजेपी सत्तासीन हुई है सरकार की नीतियों के कारण शिमला शहर में पीने के पानी, सफाई व्यवस्था व अन्य जनसेवाओं की दशा निरन्तर बिगड़ रही है। बीजेपी ने पेयजल की व्यवस्था के निजीकरण के लिए कार्य करते हुए वर्ष 2018 में पेयजल की व्यवस्था के लिए कंपनी बनाकर पीने का पानी की व्यवस्था इसके हाथों में सौंप दी है। इसके चलते जल आपूर्ति स्कीमों से पानी की पर्याप्त आपूर्ति के बावजूद शहरवासियों को तीसरे दिन पानी की आपूर्ति की जा रही है और कई क्षेत्रों में तो 4-5 दिनों के बाद पानी की आपूर्ति की जा रही है।
चौहान ने कहा कि पूर्व नगर निगम के शिमला शहर की पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था के सुधार के लिए किये गए प्रयासों से आज शिमला शहर में प्रतिदिन 38 से लेकर 47 एमएलडी तक पानी की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त आपूर्ति के बावजूद शहर में तीसरे दिन पानी की आपूर्ति की जा रही है, जोकि बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है। इससे बीजेपी की सरकार व नगर निगम शिमला की लचर व विफल कार्यशैली व पेयजल व्यवस्था के कुप्रबंधन से जनता की परेशानी बढ़ रही है और शिमला शहर में वर्ष 2018 का गम्भीर पेयजल संकट भी नगर निगम शिमला व सरकार की लचर कार्यशैली का ही परिणाम रहा है, जिससे शिमला शहर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हुई थी।
संजय चौहान ने कहा कि आगामी नगर निगम व विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने हाल ही में लोकलुभावनी घोषणाएं की, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों पानी के बिल माफ़ करने की घोषणा भी शामिल है। लेकिन शहरी क्षेत्रों में रह रहे लाखों लोगों को पानी के बिलों में छूट नहीं दी गई है। सरकार की नवउदारवादी नीतियों के कारण पेयजल जैसी जनसेवाओं के निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है और पानी की दरों में प्रति वर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि का निर्णय लिया गया है। इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है और पानी के बिलों में पिछले 5 वर्षों में करीब 65 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई है। इसके चलते शहरी क्षेत्रों में रहने वाली जनता पर इसका व्यापक असर देखा गया है और शिमला शहर में आज अधिकांश लोगों को हजारों व लाखों रुपए के पानी के बिल देकर इनपर सरकार द्वारा आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। इससे शहरी गरीब व आम जनता को पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता को प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
चौहान ने आम जनता से आग्रह किया कि सरकार व नगर निगम शिमला के द्वारा लागू की जा रही आम जनविरोधी नीतियों को पलटने के लिए संघर्ष में शामिल हो और 4 मई को शिमला नागरिक सभा के प्रदर्शन में भाग ले।
