शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने सरकार द्वारा नई पेंशन योजना (NPS) कर्मचारियों, आउटसोर्स कर्मचारियों व कर्मचारियों के अन्य वर्गों के प्रति द्वेषपूर्ण व दमनकारी रवैये की कड़ी निंदा की है। माकपा ने सरकार से मांग की है कि इन वर्गों के नेताओं के ऊपर बनाए गए सभी मामले वापिस लिए जाए।
माकपा के राज्य सचिव मंडल सदस्य संजय चौहान ने सरकार से आग्रह किया कि इन सभी वर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए तथा पुरानी पेंशन की बहाली व आउटसोर्स के लिए स्थाई नीति बनाने की जायज मांगों को मान कर इनको इनका हक़ प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि संविधान की धारा 19 व 21 में सभी को अपनी बात रखने और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने का अधिकार प्रदान किया गया है। लेकिन सरकार लोकतंत्र की सभी मर्यादाओं को नजरअंदाज कर संवैधानिक दायित्व के निर्वाहन करने के बजाए कर्मचारियों के जायज आंदोलन को दबाने का कार्य कर रही है।
संजय चौहान ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन के करीब साढ़े चार वर्ष का समय हो गया है और कर्मचारी वर्ग लम्बे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं कि सरकार उनकी मांगों पर गौर कर उन पर अमल करें। परन्तु सरकार इन मांगों पर बिल्कुल भी गौर नहीं कर रही है तथा अब जब कर्मचारी वर्ग सरकार के इस रवैये से नाराज होकर अपने लोकतांत्रिक अधिकार के दायरे में रहकर आंदोलन कर रहे हैं तो सरकार इन पर दमनकारी कार्रवाई कर मामले दर्ज कर डराने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी चुनी हुई सरकार के इस प्रकार के रवैये को जायज नहीं ठहराया जा सकता है।
माकपा नेता ने कहा कि वर्ष 2017 में चुनाव में भाजपा ने कर्मचारियों को वायदा किया था कि यदि वह सत्ता में आती है तो वह कर्मचारी हित को ध्यान में रखते हुए कार्य करेगी तथा पुरानी पेंशन की बहाली, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति व अन्य कर्मचारियों द्वारा की जा रही उनकी मांगों पर अमल करेगी। उन्होंने कहा कि आज सरकार का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, लेकिन सरकार कर्मचारियों से किए गए वायदों को पूरा नहीं कर पाई है और इससे सभी अराजपत्रित कर्मचारी, अध्यापक वर्ग, नई पेंशन कर्मचारी वर्ग, पुलिस, डॉक्टर, आउटसोर्स व स्कीम कर्मी व अन्य सभी वर्ग आज सरकार से नाराज़ है और आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीपीएम की सरकार से मांग है कि सरकार अपने कर्मचारी विरोधी रवैय्ये को छोड़ कर कर्मचारियों के साथ तुरन्त बैठक कर इनकी मांगों को मान कर अपना दायित्व निभाए।
