Spread the love

शिमला।  AICC के सचिव एवं प्रदेश के पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग के कथित घोटाले में सरकार पर मामले को रफा-दफा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि यदि सरकार सही मायने में इसकी निष्पक्ष जांच कर रही होती तो वायरल हुए आडियो टेप से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ कर गिरफ्तार करती। 
सुधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि इस मामले के जांच के तौर तरीक़े से यह पता चलता है कि जैसे किसी बड़े व्यक्ति के दबाव में आकर पूरी जांच को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने शंका जाहिर की कि जहां सरकार के अधिकारी और ऊंची पहुंच वाले लोग ऐसे मामलों में जुड़े हुए हों तो लगता नहीं है कि निष्पक्ष जांच हो पाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे में इस मामले की जांच CBI को सौंप देनी चाहिए या फिर उच्च न्यायालय को इन सारी घटनाओं का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। 
शर्मा ने कहा कि इस मामले में कहां तो पुलिस को कथित आरोपी की पुलिस कस्टडी मांगकर पूछताछ करनी चाहिए थी, लेकिन उसको न्यायिक हिरासत में भेज कर पुलिस ने एक बड़ी चूक की है। उनका कहना है कि कानूनन न्यायिक हिरासत में किसी व्यक्ति को तभी भेजा जाता है जब उससे पुलिस को न तो कुछ बरामद करना हो और न ही कोई पूछताछ करनी हो, लेकिन यहां पहले ही दिन न्यायिक हिरासत में भेज कर अपराधी निदेशक को पूरी छूट दी गई कि वह जो भी जरूरी दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ कर सके और जो सबूत हो उन्हें मिटा सके। 
सुधीर शर्मा ने सवाल उठाया कि कहीं इसमें पुलिस, जो सरकार के अधीन है और कथित आरोपी की मिलीभगत तो नहीं है, या कहीं ऐसा तो नहीं कि उसे बचाने के लिए, बजाए पुलिस कस्टडी मिलने के जानबूझ कर उसको न्यायिक हिरासत में लिया गया हो। उन्होंने कहा कि न्यायिक हिरासत में न तो उससे कोई पूछताछ हो सकती है और जिस तरह मीडिया में चर्चा है वह फोन पर ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर रहा हो।
सुधीर शर्मा ने कहा कि जो कथित audio tape सामने आई है, जिसमें निदेशक एक व्यक्ति से लेन-देन की बात कर रहे हैं और उस व्यक्ति को राजनीतिक रसूख़ वाला व्यक्ति बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उसकी भी अभी तक गिरफ़्तारी नहीं हुई है जिससे की ये पता चलता है कि जांच का रवैया ढुलमुल है। अगर उस व्यक्ति की गिरफ़्तारी समय रहते नहीं होती है तो हो सकता है कि वो जांच संबंधी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करे। उनका कहना था कि इस मामले में होना तो यह चाहिए था कि दोनों की गिरफ़्तारी एक साथ होती और जांच को शुरू कर दिया जाता। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए या तो मामला सीबीआई को सौंपा जाए या फिर हाईकोर्ट को इसका संज्ञान लेते हुए जांच करवानी चाहिए। 

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *