शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पिछले दिनों हुए घटनाक्रम के बाद विपक्ष के निशाने पर कुलपति को भाजपा का साथ मिला है। भाजपा के अग्रणी संगठनों ने विश्वविद्यालय के कुलपति पर कांग्रेस और माकपा पर की जा रही टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय में करवाए गए कार्यों को गिनाया।
भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जवाहर शर्मा, किसान मोर्चा अध्यक्ष राकेश बबली, युवा मोर्चा अध्यक्ष अमित ठाकुर, अनुसूचित जाति मोर्चा अध्यक्ष नितेन कुमार, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष ओपी चौधरी, अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष मोहम्मद राजबली ने जारी एक संयुक्त बयान में कहा कि कांग्रेस और माकपा द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हो रहे कायाकल्प एवं विकासात्मक कार्यों से बौखलाई है, इसलिए विश्वविद्यालय को राजनीति का अखाड़ा बना रही है और योग्य एवं ईमानदारी से कार्य कर रहे कुलपति प्रो. सिकन्दर कुमार पर उल-जलूल एवं निराधार आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
इन भाजपा नेताओं ने कहा कि विपक्षी दलों के पास कोई विकासात्मक मुद्दा नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति पर आरोप लगाने से पहले विपक्ष को यह भी जान लेना चाहिए कि लगभग 100 करोड़ रुपए से जहां निर्माण कार्य सौंदर्यीकरण एवं विकासात्मक कार्य हो रहे हैं, वहीं टीचिंग फैकल्टी में हमेशा जो कमी रहती थी उसको भरने के लिए विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार 153 अध्यापकों को मैरिट के आधार पर नियुक्ति दी गई है। वहीं 12 नए डिपार्टमेंट खोले गए हैं। केन्द्र से 30 करोड़ रुपए चार होस्टलों के लिए स्वीकृत करवाए है और 20 करोड़ रुपए आईसीटी के लिए स्वीकृत करवाए। पहली बार विश्वविद्यालय की निशानदेही हुई है, जिसमें 92.13 बीघा जमीन को अवैध कब्जाधारियों से छुड़वाकर विश्वविद्यालय को वापिस दिलाई गई है। इसके साथ-साथ लगभग 4.5 करोड़ रुपए विदेशी छात्रों के लिए होस्टल बनाने के लिए स्वीकृत करवाए हैं। इसके अतिरिक्त 42 करोड़ के प्रपोजल केन्द्रीय शिक्षा मंत्री को भेजे गए हैं। इन भाजपा नेताओं ने कहा कि पहली बार 16 में से 11 होस्टलों तथा लाईब्रेरी का रेनोवेशन हुआ है, माॅडल स्कूल को अपग्रेड कर सीनियर सेकेंडरी कर सीबीएससी से मान्यता दिलवाई एवं रिक्त पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नाॅन टीचिंग स्टाफ में जो पद रिक्त पद पड़े हैं, उनको भरने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। नाॅर्थ इंडिया में पहली बार छात्रों के भविष्य को देखते हुए ऑन स्क्रीन पारदर्शिता के साथ मूल्यांकन किया गया। पहली बार विश्वविद्यालय में प्रवेश करने पर विश्वविद्यालय का नक्शा बदलता हुआ दिख रहा है जोकि कांग्रेस व वामपंथियों को रास नहीं आ रहा है। निराधार आरोप लगाकर विश्वविद्यालय एवं कुलपति की छवि को खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में जो भी विकासात्मक कार्य और जो भी भर्तियां हो रही हैं, पूरी पारदर्शिता एवं नियमों के आधार पर हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका लगती है तो उच्च न्यायालय से इसकी जांच करवा सकता है। उन्होनें कहा कि पूर्व की कांग्रेस सरकार द्वारा विश्वविद्यालय एवं पूरे प्रदेश में चिटों पर भर्तियां की जाती थी, लेकिन विश्वविद्यालय में अब सभी प्रकार के कार्य ईमानदारी, पारदर्शिता एवं नियमों के आधार पर हो रहे हैं, जो इनके गले से नहीं उतर रहे हैं।
