शिमला। किसान संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार के उपक्रम एचपीएमसी व अन्य एजेंसियों द्वारा सेब व अन्य फलों की पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कार्टन की कीमतों में की गई भारी वृद्धि की कड़ी निंदा की है। समिति ने सरकार से मांग की कि इस वृद्धि को तुरन्त वापिस लिया जाए तथा बागवानों को सस्ती दरों पर समय रहते कार्टन उपलब्ध करवाया जाए।
समिति के महासचिव संजय चौहान ने मंगलवार को यहां कहा कि पिछले वर्ष बाज़ार में कार्टन 45 रुपए से 55 रुपए के दामों पर उपलब्ध था। इस वर्ष सरकार ने इसकी कीमत बढ़ाकर 55 रुपए से 75 रुपए तक कर दी, जोकि 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि है। इससे बागवानों पर करीब 80 से 90 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस संकट के दौर में सरकार का कार्टन की दामों में की गई अप्रत्याशित वृद्धि का निर्णय बिल्कुल किसान व बागवान विरोधी है।
संजय चौहान ने कहा कि हाल में प्रदेश के बागवानी मंत्री ने बयान दिया था कि इस वर्ष कार्टन के दामों में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी और सरकार बागवानों को पिछले वर्ष के दाम पर ही कार्टन उपलब्ध करवाएगी। लेकिन इस बयान के 20 दिनों बाद ही सरकार ने कार्टन के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि कर बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है। उन्होंने कहा कि सरकार की इस प्रकार की कार्यशैली से सरकार व मंत्री दोनों की मंशा पर संशय पैदा होता है और सरकार प्रदेश के बागवानों के प्रति कितनी संजीदा है उस पर भी सवालिया निशान लगता है। उनका कहना था कि कार्टन के दामों में की गई इस अप्रत्याशित वृद्धि से स्पष्ट हो गया है कि सरकार कार्टन निर्माताओं के दबाव में आकर कार्य कर रही है और इस तरह के किसान व बागवान विरोधी निर्णय ले रही है।
किसान नेता ने कहा कि अब जब कार्टन के दामों में भारी वृद्धि की गई है तो ऐसी स्थिति में विशेष रूप से मंत्री के कार्टन के दामों में वृद्धि न करने का बयान आज बिल्कुल औचित्यहीन हो गया है। इस प्रकार के हल्के बयान से सरकार व मंत्री पद दोनों की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है। उन्होंने कहा कि आज किसान व बागवान अत्यंत संकट के दौर से गुजर रहा है। एक ओर प्राकृतिक आपदा जैसे भारी ओलावृष्टि, वर्षा व बर्फबारी से पहले ही सेब व अन्य फसलों को करीब 70 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है। सरकार ने इसका कुछ आंकलन किया, लेकिन आजतक एक भी रुपए का मुआवजा व राहत किसानों व बागवानों को नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि संकट के इस दौर ने सरकार ने कार्टन व अन्य लागत सामग्री की कीमतों में वृद्धि कर और अधिक आर्थिक संकट पैदा कर दिया है। चौहान ने कहा कि समिति सरकार से मांग करती है कि इन किसान विरोधी निर्णयों को तुरन्त बदले और कार्टन व अन्य लागत वस्तुएं सब्सिडी पर सस्ते दामों पर किसानों व बागवानों को उपलब्ध करवाए तथा किसानों को प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा व सहायता तुरन्त प्रदान कर अपना दायित्व निभाए।
