शिमला। संघर्ष का आधा साल बीत जाने के बाद भी किसानों का हौसला नहीं टूटा। किसान अभी भी पूरी ताकत के साथ संघर्ष में डटे हुए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर शनिवार को किसानों ने देशभर में काले कृषि कानूनों की प्रतियों का दहन किया। इसके तहत शिमला में किसान मोर्चा के संगठनों ने कृषि कानूनों की प्रतियों को जलाते हुए संघर्ष ज़िंदा रहने की गवाही दी।
हिमाचल किसानसभा के जिलाध्यक्ष सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि यह शर्मनाक है कि केंद्र सरकार किसानों के प्रति उदासीन ही नहीं, असंवेदनशील बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र सरकार किसानों की मांगें नहीं मान लेती, आंदोलन जारी रहेगा। पुंडीर ने जानकारी दी कि प्रदेश के सभी जिलों के करीब 30 खण्डों में पांच सौ से अधिक गांवों व पंचायतों में लोगों ने काले कृषि कानूनों को जलाया। इस पूरी प्रक्रिया में हजारों लोगों ने भाग लिया। वहीं, किसान सभा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य प्रो. राजेन्द्र चौहान ने कहा कि 1974 के बाद आज फिर से किसान सम्पूर्ण क्रांति का उद्घोष कर रहा है, जिसकी आंधी वर्तमान किसान विरोधी केंद्र सरकार को सत्ता से उखाड़ फेेंकेगी। उन्होंने कहा कि न केवल केंद्र में, बल्कि राज्यों से भी जल्दी भाजपा का सफाया होगा। जिला कोषाध्यक्ष जयशिव ठाकुर ने भी प्रदर्शन कर रहे किसानों को संबोधित किया।बता दें कि पिछले साल 5 जून को केंद्र सरकार तीन ऐसे कृषि कानून लाई थी, जिनको किसानों ने स्वीकार नहीं किया और उन्हें निरस्त करने की मांग उठाई।
