शिमला। जन स्वास्थ्य अभियान की हिमाचल इकाई ने कहा है कि प्रदेश में उत्तरी भारत के स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य मानक होने के बावजूद सरकार द्वारा स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति संवेदनहीनता का परिचय देकर इनके मनोबल को गिराने का कार्य किया जा रहा है। इकाई का कहना है कि कोविड अस्पतालों में सेवाएं देने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों के क्वारंटीन पीरियड में लगातार कटौती करते हुए आज इसे सरकार ने लगभग खत्म ही कर दिया है। इससे इनके घर-परिवार, सहयोगियों एवं कार्यस्थल में संक्रमण का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। साथ ही, मानसिक तनाव के शिकार होते जा रहे हैं।
जन स्वास्थ्य अभियान के राज्य संयोजक सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि वैसे भी 4 घंटे से अधिक पीपीई किट के साथ सेवाएं देना अपने आप में काफी मुश्किल कार्य है। इसके साथ ही कोविड अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं जैसे पर्याप्त वार्ड बॉयज, सफाई व सुरक्षा कर्मियों की कमी, महिलाओं व पुरूषों को अलग शौचालय व बाथरूम की सुविधाओं की भी कमी है। उन्होंने कहा कि कमला नेहरू अस्पताल में तो हाल और भी बदतर हैं, जहां पर कोविड वार्ड एवं अन्य सामान्य वार्डों में सेवाएं देने वाले वही कर्मी हैं। ऐसे में संक्रमण फैलने के खतरे को बखूबी आंका जा सकता है। यहां पर तो स्वास्थ्य कर्मी वैक्सीन लगाने के बाद भी दूसरी एवं तीसरी बार संक्रमित हो चुके हैं।ऐसी परिस्थिति में जन स्वास्थ्य अभियान की हिमाचल इकाई मांग करती है कि इस महामारी भयंकर फैलाव को रोकने के लिए कोविड में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड मानकों के मुताबिक क्वारंटीन पीरियड दिया जाए तथा पर्याप्त स्टाफ विषेषकर वार्ड बॉयज एवं नर्सिंग स्टाफ को भर्ती किया जाए। पुंडीर ने कहा कि कोविड अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं, पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। पुंडीर ने कहा कि जन स्वास्थ्य अभियान, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर कार्य करने वाला एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है, जिसमें प्रदेश में भी सामाजिक सरोकार से जुड़े संगठनों जैसे हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति, एचपीएमआरए, बहु- उद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, डाॅक्टर एवं स्वास्थ्य विषेषज्ञ, हिमाचल किसान सभा, जनवादी महिला समिति, बेटी बचाओ अभियान, वाईडब्ल्यूसीए, मण्डी साक्षरता एंव जन विकास समिति, नौजवान सभा, तकनीकी विकास समिति, सीआईटीयू, अधिवक्ता, मीडियाकर्मी आदि विभिन्न संगठनों एवं समुदायों से सदस्य शामिल हैं।
