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पूरे देश में किसानों के नाम पर शोर करने वाली कांग्रेस ने बढ़ाया पाँच गुना बिजली का बिल – जयराम ठाकुर

300 यूनिट फ्री बिजली देने की गारंटी देकर सत्ता में आई थी सुक्खू सरकार

शिमला। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बिजली बिल पर सुक्खू सरकार को घेरा है। उन्होंने तंज कसा कि व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार शुल्क की सरकार हो गई है और प्रदेशवासियों को लगातार किसी न किसी तरह के शुल्क के झटके दे रही है। व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार किसानों को भी बिजली के बिल के झटके दे रही है। सरकार किसानों द्वारा सिंचाई के लिए गए बिजली कनेक्शन के बिजली बिल अब पाँच से छह गुना बढ़ाकर वसूल रही है। यह प्रदेश सरकार की गरीब किसानों के साथ ज्यादती है। 

जयराम ठाकुर ने कहा कि खेतों की सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले बिजली के बिल में इस प्रकार की वृद्धि लोगों समझ के परे है। किसानों को बिजली के बिल में इतनी वृद्धि पर भरोसा ही नहीं हो रहा है और लोग बिजली बोर्ड के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह किसानों के साथ अन्याय है। पूरे देश में कांग्रेस किसान के नाम पर शोर डालती है और हिमाचल में किसानों के सिंचाई के बिल को पाँच गुना बढ़ा देती है। उन्होंने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री सिर्फ़ अपने हवा हवाई वादों में ही किसानों का हितैषी होने का दावा करते हैं? पूरे देश में कांग्रेस किसान के नाम पर झूठ फैलाए और जहाँ अपनी सरकार है वहाँ के किसानों से सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली के दाम पाँच गुना बढ़ा दे। किसानों के साथ सरकार की यह मनमानी नहीं चलेगी। 

जयराम ठाकुर ने कहा, “प्रदेशभर से मुझे कई किसान परिवारों के फोन आ रहे हैं। सब बिजली के बढ़े हुए बिल को लेकर अपनी बात कर रहे हैं। लोग अपने बिजली के पुराने और नए बिलों को भेजकर बता रहे हैं कि किस तरह से उन्हें पिछले महीने के मुकाबले पाँच गुना से ज़्यादा का बिल मिला है। ऊना के कुछ किसानों द्वारा भेजे गए बिजली बिल को मैंने देखा जिसमें एक मार्च से एक अप्रैल के बीच 605 यूनिट बिजली खर्च हुई थी और उनका बिजली बिल 669 रुपए का था, जिसमें 370 रुपए सरकार द्वारा लगाए गए सेस के भी शामिल थे। उसी किसान द्वारा मई माह में 591 यूनिट बिजली का उपयोग अपने खेतों की सिंचाई के लिए करने पर बिजली का बिल 3445 रुपए का बिलजी बोल थमाया गया है। जिसमें 356 रुपए सेस के भी शामिल हैं। ऐसा सिर्फ एक किसान के साथ नहीं है। कई किसानों के बिजली बिल इसी प्रकार कई-कई गुना बढ़ कर आए हैं। यह प्रदेश के किसानों के साथ अन्याय है।”

जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर लोगों से इस तरह की वसूली नहीं कर सकती है। सरकार किसानों को राहत देने के बजाय उन्हें बिजली के झटके क्यों दे रही है। इस तरह से बिजली के दामों की वृद्धि किसानों की कमर तोड़ देगी, सरकार अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करे और किसानों को राहत प्रदान करे। उन्होंने कहा कि सरकार एक ‘वेलफेयर स्टेट’ के रूप में काम ही नहीं करना चाहती है। सरकार जितनी जिम्मेदारी से प्रदेश के लोगों पर टैक्स लाद रही है और शुल्क लगा रही है, काश उसी तरह से लोगों की सुविधाओं का ख्याल रखती तो बेहतर था। 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक दिन सरकार छुट्टे का बहाना बनाकर बसों का मिनिमम किराया पाँच रुपए से बढ़ाकर दस रुपए कर देती है और फिर लंबी दूरी की बसों का 15 फ़ीसदी से ज़्यादा किराया बढ़ा देती है। कभी आउटसोर्स को नौकरी से निकाल देती है तो कभी बेरोजगारों की आवाज़ दबाने की कोशिश करती है, कभी कर्मचारियों को मुकदमे के जोर पर डराती है। इसके साथ ही प्रदेश के लोगों से हिम केयर से होने वाले इलाज की सुविधा छीन लेती है। शगुन, सहारा, स्वावलंबन जैसी योजनाए बंद करती है। प्रदेश सरकार का किसानों के साथ किया जा रहा है यह बर्ताव ग़लत है और सरकार तानाशाही की बजाय मानवीय दृष्टि से विचार करे।

By admin

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