कहा – मित्रों को बचाने के लिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए खर्च, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय में खड़े किए जा रहे बड़े-बड़े वकील
पूछा – ऐसा तो नहीं कि पर्यटन विभाग के होटलों को अपनी मित्रमंडली को लीज पर देना चाहते हैं मुख्यमंत्री
हिमाचल प्रदेश में माफिया संचालित सरकार, मुख्यमंत्री मजबूर
शिमला। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मीडिया विभाग के प्रभारी रणधीर शर्मा ने कहा है कि कांग्रेस सरकार के फैसले और उच्च न्यायालय के निर्णय यह साबित करते हैं कि कांग्रेस की वर्तमान सरकार हर मोर्चे, हर क्षेत्र में फेल है और नाकाम सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार आरोप लगा रही है कि वर्तमान सरकार माफिया राज के दबाव में काम कर रही है। चाहे वह खनन, भू, ड्रग, वन किसी भी प्रकार का माफिया हो। अब तो इस सरकार में तबादला माफिया भी सक्रिय हो गया है और यह माफिया सरकार के संरक्षण में पनप रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया का सरगना मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में है और मुख्यमंत्री का स्वयं उनको संरक्षण है। ईडी की गिरफ्तारियां इन आरोपों को सिद्ध करती है।
रणधीर शर्मा ने बुधवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि खनन माफिया ऊना, सिरमौर, बीबीएन और कांगड़ा में तेजी से फल फूल रहा है। कई जगह तो माफिया में सरकार के कारणधार भी शामिल हैं। अगर इनको संरक्षण देने के लिए किसी अधिकारी को दबाव दिया जाता है और वह मानता नहीं तो उसके ऊपर भी दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वन माफिया के लिए तो जंगल कटान के रास्ते खोल दिए गए हैं।
शर्मा ने कहा कि हाल ही में उच्च न्यायालय ने हिमाचल भवन दिल्ली को अटैच करने के आदेश दिए, यह गंभीर विषय है, पर मुख्यमंत्री अपनी कमियों को छुपाने के लिए विपक्ष पर दोषारोपण कर रहे हैं। यह मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता है। हम उनसे पूछना चाहेंगे कि 5000 करोड़ की कौन सी संपत्ति है जो भाजपा राज में नीलाम हुई, इस पर उन्हें स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पर टिप्पणी की, यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। इसके विपरीत उनको अपने मित्र एजी से पूछना चाहिए कि क्या उच्च न्यायालय में लगे मामलों की ढंग से पैरवी भी की थी या नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता तो बोलते थे कि मुख्यमंत्री तानाशाह हैं, शायद वह सही बोलते थे।
भाजपा नेता ने कहा कि उच्च न्यायालय ने पर्यटन विभाग के 18 होटल बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार तो पर्यटन बढ़ाने का गुणगान करती थी, पर शायद उन्होंने इन होटल को लाभ में लाने का प्रयास ही नहीं किए। क्या इस केस की भी उनकी मित्र मंडली ने पैरवी नहीं की क्या? मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या इस निर्णय के प्रति सरकार अपील करेगी या इन होटलो को अपने बचे हुए मित्रों को लीज पर देगी?
रणधीर शर्मा ने कहा कि राजनीतिक गलियारों में सीपीएस के निर्णय की चर्चा है, पर ऐसी क्या मजबूरी है कि मुख्यमंत्री अपने मित्रों को बचाना चाहते हैं और उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय में बड़े-बड़े वकील कर, करोड़ों रुपए खर्च कर, सरकारी खजाने पर बोझ डालते हुए इनको बचाना चाहते हैं। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री मजबूर मुख्यमंत्री हैं, जो आर्थिक खजाने के खाली होने का रोना रोते हैं और दूसरी ओर सीपीएस का खर्च रोकना नहीं चाहते हैं।
रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि हाल ही में सरकार ने एक अधिसूचना जारी की है जिसमें मुख्यमंत्री की तस्वीर पब्लिक रिलेशन विभाग द्वारा ही भेजी जाएगी, शायद सरकार यह मानती है कि फोटो से मुख्यमंत्री की इमेज बनती है। अगर ऐसा है तो उनको एक हीरो को ही मुख्यमंत्री बना देना चाहिए था। मुख्यमंत्री की छवि अच्छे निर्णय लेकर बनती है ना कि टॉयलेट टैक्स या समोसा की इंक्वारी से। यह सब निर्णय हास्यास्पद है।
